
जयपुर/उदयपुर। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अरनोद थाने के एसएचओ सुरेंद्र सिंह सोलंकी और उसके दलाल गुड्डू लाल उर्फ कांतिलाल प्रजापत की एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) द्वारा 8 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तारी ने पुलिस विभाग की छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से पुलिस की नैतिकता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं, विशेष रूप से मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में।
घटना का खुलासा तब हुआ जब एसीबी मुख्यालय को शिकायत मिली कि एसएचओ सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस) एक्ट के मामले में परिवादी से 8 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। यह राशि दलाल गुड्डू लाल उर्फ कांतिलाल प्रजापत के माध्यम से मांगी गई थी। एसीबी के महानिदेशक डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा के निर्देश पर एसीबी की प्रतापगढ़ इकाई ने शिकायत की सत्यता की जांच की और उसके बाद टीम ने ट्रेप ऑपरेशन को अंजाम दिया।

पुलिस की साख पर सवाल :
इस घटना से पुलिस विभाग की साख पर एक बार फिर से बट्टा लगा है। मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस द्वारा इस प्रकार की हरकतें बेहद चिंताजनक हैं। यह सवाल उठता है कि जिन अधिकारियों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, जब वही कानून के रक्षक भ्रष्टाचार में लिप्त हों, तो आम जनता का विश्वास कैसे कायम रह सकता है? यह घटना यह भी दर्शाती है कि पुलिस महकमे में सुधार और पारदर्शिता की कितनी सख्त आवश्यकता है।
आगे की कार्रवाई
एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, श्रीमती स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मामले की निष्पक्षता से जांच हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले।
एडिटर कॉमेंट
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कानून के संरक्षकों को भी कानून के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए। पुलिस विभाग में इस तरह की घटनाएं न केवल विभाग की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में भी अविश्वास का माहौल पैदा करती हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इन मामलों में दोषियों को सख्त सजा देकर एक कड़ा संदेश दिया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी कानून से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।
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