
उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान की सरपरस्ती में आयोजित 42वां निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह बेमिसाल मिसाल बन गया, जहाँ खुशियों की चमक ने हर चेहरे को रोशन कर दिया। लियों का गुड़ा (बड़ी) स्थित सेवा महातीर्थ के हाड़ा सभागार में शनिवार को जब 51 दिव्यांग जोड़ों की हल्दी और मेहंदी की रस्में पारंपरिक गीतों और सुरमई नृत्य के बीच अदा की गईं, तो माहौल में इश्क और मोहब्बत की खुशबू घुल गई।


पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ और कमला देवी अग्रवाल की सरपरस्ती में इस खास मौके का आगाज़ हुआ। हर रस्म को गहनता से निभाते हुए, गणपति के पूजन से लेकर हर जोड़े की मेहंदी और हल्दी की रस्में संपन्न हुईं। इस दौरान, देश के कोने-कोने से आए मेहमानों ने भी नाच-गाकर अपने जज़्बातों का इज़हार किया, और यक़ीनन यह लम्हे उनके दिलों में हमेशा के लिए बस गए।

शाम का मंजर भी कुछ कम दिलकश न था। संगीत की महफ़िल में हर कोई खुशी के रंग में रंगा नजर आया। संगीत की सुरमयी धुनों पर जब नाचते हुए जोड़ों ने अपने अरमानों को ज़ाहिर किया, तो माहौल में खुशियों का गुलशन खिल उठा। दिव्यांगता की परछाई कहीं भी नजर नहीं आई, हर चेहरा उम्मीदों की सुनहरी रोशनी से चमकता हुआ दिखाई दिया।

संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि संस्थान का मकसद दिव्यांगों और कमजोर तबकों को समाज की मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें बराबरी का हक दिलाना है। उन्होंने बताया कि अब तक 2,357 जोड़े अपनी गृहस्थी बसाकर खुशहाल जीवन बिता रहे हैं, और आज के समारोह में भी कुछ जोड़े अपने बच्चों के साथ यहां आए, जिससे खुशी की बयार और भी ताजगी से भर गई।

रविवार की सुबह, जब 11 बजे 51 जोड़ों की वरमाला और पाणिग्रहण संस्कार की रस्में अदा होंगी, तो इस समारोह का समापन एक नई जिंदगी की दुआओं के साथ होगा। संस्थान के संस्थापक कैलाश ‘मानव’ ने इस मौके पर सभी दानवीरों का शुक्रिया अदा किया और नव विवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की नई शुरुआत की मुबारकबाद दी।



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