
उदयपुर। नगर निगम उदयपुर के दीपावली मेले का छठा दिन अद्भुत काव्य संध्या के नाम रहा, जहां देश के ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी काव्य प्रस्तुति से रात भर दर्शकों को बांधे रखा। नगर निगम प्रांगण में आयोजित इस कवि सम्मेलन में देर रात तक शहरवासियों का उत्साह चरम पर था। दर्शकों का यह जोश देखना दिलचस्प था, जो कवियों की हर पंक्ति पर तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मेला प्रांगण गूंजाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजस्थान सरकार के मंत्री जोराराम कुमावत, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया सहित गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद मंच पर जैसे ही मशहूर कवि शैलेश लोढ़ा आए, उनके अभिवादन में तालियों का ऐसा स्वागत हुआ कि मानो शहर ने उन्हें बाहों में भर लिया हो। लोढ़ा ने अपने अंदाज में कविता सुनाई, जिससे दर्शकों में हास्य की लहर दौड़ गई, और हर पंक्ति पर ठहाके गूंजते रहे।

काव्य संध्या में बही हास्य, वीर और श्रृंगार की त्रिवेणी
शुरुआत कवि संजय झाला ने अपने अनोखे अंदाज में की, जिनकी पारिवारिक रिश्तों पर आधारित कविता “भाई की हंसी ताकत सवाई है, बहन की हंसी मजबूत कलाई है…” ने श्रोताओं को अपने रिश्तों पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया। उनके बाद कवयित्री कविता किरण ने अपनी भावपूर्ण कविताओं से श्रोताओं के दिलों में ऐसी छाप छोड़ी कि हर शब्द पर तालियों की गूंज थमने का नाम नहीं ले रही थी। उनकी पंक्तियां, “दीया होकर जो तूफां से लड़ा है, यकीनन कद में सूरज से बड़ा है…” ने सभी का दिल जीत लिया।

कवि सम्मेलन में डॉ. भुवन मोहिनी की कविता ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उनकी कविता, “किनारे बैठकर जब जब लहर पर मुस्कुराती हूँ, वो मुझमें डूब जाता है, मैं उसमें डूब जाती हूँ…” ने रोमांस का माहौल बना दिया, और दर्शकों ने इस कविता का तालियों से स्वागत किया। इसी प्रकार कवि गोविंद राठी की कविता, “धरती अंबर रखा हुआ है मेरी मां की गोद में…” ने भावुकता का ऐसा रंग बिखेरा कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
देशभक्ति का ज्वार और मेवाड़ी गर्व का एहसास
इटावा के गौरव चौहान ने अपनी कविता में “पृथ्वी राणा वीर शिवा की अमिट विरासत वाले हैं, तुम्हें मुबारक रहे इंडिया, हम तो भारत वाले हैं…” जैसी पंक्तियों से देशभक्ति का ज्वार पैदा कर दिया। दर्शकों ने खड़े होकर भारत माता की जय के नारों से मेले का वातावरण रोमांचित कर दिया। इसके बाद मेवाड़ के कवि अजातशत्रु ने अपनी कविता, “स्वर्ग मिले ठुकराता हूं, इस मिट्टी में जन्म लिया है, गीत यहाँ के गाता हूं…” के माध्यम से मेवाड़ की महिमा का ऐसा गुणगान किया कि हर श्रोता अपने मेवाड़ी होने पर गर्वित हो गया।

हंसी की फुलझड़ियां और सामाजिक संदेश
पार्थ नवीन ने अपनी हास्य कविता “उड़ते रहो हवाओं में कपूर की तरह, बजते रहो फिजाओं में संतूर की तरह…” से दर्शकों को खूब गुदगुदाया और मेला प्रांगण में ठहाकों की धूम मचा दी। कवि मनोज गुर्जर ने अपनी कविता, “गुलशन में खिले फूल सी, होती है बेटियाँ…” से समाज को बेटियों की अहमियत का संदेश दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बेटियां केवल परिवार की नहीं बल्कि समाज के भविष्य की भी धरोहर हैं।

आज भजन संध्या से होगा दीपावली मेले का समापन
नगर निगम सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष चंद्रकला बोल्या ने बताया कि दीपावली मेले का समापन आज रात्रि में भव्य भजन संध्या के साथ होगा, जिसमें भजन गायक प्रकाश माली और आकृति मिश्रा अपने सुरों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। मेले में दुकानें और झूले भी 4 नवंबर तक संचालित रहेंगे, जिससे दर्शक अपने परिवार के साथ मेले का आनंद ले सकेंगे।



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