
उदयपुर। शहर के रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बन रहा एलिवेटेड रोड जहां भविष्य में यातायात को सुगम बनाने की उम्मीद जगाता है, वहीं वर्तमान में यह लोगों की सेहत और वाहनों की हालत बिगाड़ने का कारण बन रहा है। निर्माण स्थल के दोनों ओर सर्विस रोड में गडढ़े, उठती धूल, लगातार शोर और अव्यवस्थित ट्रैफिक से स्थानीय लोग परेशान हैं। हालांकि कलेक्टर नमित मेहता ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए व्यवस्था सुधारने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
रेलवे स्टेशन और आसपास के मोहल्लों में रहने वाले लोगों का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली धूल से सांस लेने में तकलीफ़, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। बुजुर्गों और बच्चों पर इसका असर ज्यादा देखा जा रहा है। वहीं, निर्माण कार्य में लगी मशीनों और हथौड़ों की तेज़ आवाज़ से नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
स्टेशन मार्ग से रोजाना गुजरने वाले वाहन चालकों की भी मुश्किलें कम नहीं हैं। धूल और कंकड़ से वाहनों के इंजन व फ़िल्टर खराब होने की शिकायतें मिल रही हैं। वहीं सड़क पर जगह-जगह रखी गई निर्माण सामग्री और गड्ढों की वजह से जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासियों और यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण एजेंसियों को प्रदूषण और सुरक्षा प्रबंधन पर सख्ती से ध्यान देना चाहिए।
निर्माण क्षेत्र में नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए। ट्रकों और डंपरों को ढककर ही सामग्री ढुलाई की जाए। पूरे क्षेत्र को बैरिकेडिंग और ग्रीन नेट से सुरक्षित किया जाए। रात के समय पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
ट्रैफिक डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग का सही प्रबंधन किया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते सख़्त कदम नहीं उठाता, तो निर्माण कार्य के लंबे समय तक खिंचने से आमजन और यातायात दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, अगर प्रदूषण और ट्रैफिक नियंत्रण के साथ सुरक्षा उपाय किए जाते हैं तो यह एलिवेटेड रोड भविष्य में शहरवासियों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
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