
उदयपुर | उदयपुर जिले के फुलवारी की नाल अभयारण्य क्षेत्र में बुधवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक भालू ने बैल की तलाश में जंगल गए दो ग्रामीणों पर अचानक हमला कर दिया। इस घटना में दोनों ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद उदयपुर रेफर किया गया है।
घटना फलासिया पंचायत समिति के धरावण गांव की बताई जा रही है। घायल ग्रामीण मोतीलाल (35) पुत्र भीमराज खराड़ी और मोहनलाल (40) पुत्र कालू खराड़ी अपने बैल की तलाश में जंगल की पहाड़ी पर गए थे। इसी दौरान करीब शाम साढ़े 4 बजे अचानक एक भालू सामने आ गया।
मोहनलाल पर पहले हमला हुआ। मोतीलाल ने साथी को बचाने की कोशिश की, लेकिन भालू ने उस पर भी हमला कर दिया। दोनों ने शोर मचाया, जिसके बाद भालू वापस जंगल की ओर भाग गया।
मोहनलाल को सिर पर गंभीर चोट आई है। मोतीलाल के सिर और कान पर चोट लगी, साथ ही हाथ-पैर में गहरे घाव हैं। पैर पर 12 टांके आए हैं। दोनों को पहले फलासिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत देखते हुए उन्हें उदयपुर रेफर किया गया।
पानरवा वन क्षेत्र के रेंजर राजेश ने बताया—“भालू के हमले की सूचना मिलते ही हमारी टीम मौके पर पहुंच गई। संबंधित एरिया में गश्त बढ़ा दी गई है और आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।”
फुलवारी की नाल सेंचुरी : भालुओं का घर
फुलवारी की नाल सेंचुरी उदयपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है।
इसका क्षेत्रफल करीब 511 वर्ग किलोमीटर है।
सेंचुरी को कोटड़ा, मामेर और पानरवा रेंज में बांटा गया है।
हाल ही में हुई वन्यजीव गणना के अनुसार यहां 48 भालू मौजूद हैं।
सेंचुरी क्षेत्र के भीतर करीब 133 गांव बसे हुए हैं, जिससे इंसानों और जंगली जानवरों का आमना-सामना अक्सर होता है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जंगलों के नजदीक रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। अक्सर पशुधन की तलाश या लकड़ी-चारा लेने गए लोग जंगली जानवरों के संपर्क में आ जाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में ग्रामीणों को समूह में जाना चाहिए और वन विभाग को नियमित जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाएं कम हो सकें।
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