
उदयपुर। पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, मावली में आयोजित कविता एवं कहानी लेखन कार्यशाला ने विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए द्वार खोले। इस कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ ने किया।
रचनात्मक लेखन की बारीकियां
आशा पाण्डेय ने विद्यार्थियों को बताया कि कविता केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि भावनाओं का अनुशासित प्रवाह है। उन्होंने छंद, तुक, लय और सुर की महत्ता पर प्रकाश डाला और समझाया कि छंदबद्ध एवं अतुकांत दोनों प्रकार की कविताओं की अपनी-अपनी अभिव्यक्तिगत विशेषताएँ होती हैं।
कहानी के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि कहानी जीवन के अनुभवों का प्रतिबिंब है। हर व्यक्ति में सुनने और सुनाने की प्रवृत्ति होती है, जो उसे सहज रूप से कहानीकार बनाती है। कहानी लेखन में एक घटना, एक प्रसंग या एक स्थिति को संपूर्णता के साथ प्रस्तुत करना आवश्यक है।
शिक्षा और रचनात्मकता का संगम
इस कार्यशाला ने विद्यार्थियों को यह सीख दी कि साहित्य केवल परीक्षा की तैयारी का साधन नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों को संजोने और अभिव्यक्त करने का माध्यम है। रचनात्मक लेखन से विद्यार्थियों में कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति कौशल का विकास होता है।
विद्यालय प्रशासन ने भी यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें कला और साहित्य की धारा भी प्रवाहित रहनी चाहिए।
भागीदारी और परिणाम
कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 60 विद्यार्थियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। बच्चों ने कविता और कहानी की संरचना, भाषा और भावों को सरल ढंग से समझा।
अंत में शिक्षिका विमला सोनी ने साहित्यकार आशा पाण्डेय ओझा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को लेखन की नई दृष्टि मिली है, जो उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होगी।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से सार:
• यह कार्यशाला विद्यार्थियों के रचनात्मक कौशल को निखारने का माध्यम बनी।
• बच्चों को कविता और कहानी लेखन की तकनीक ही नहीं, बल्कि साहित्यिक सोच भी विकसित करने का अवसर मिला।
• विद्यालय ने शिक्षा को केवल शैक्षणिक दायरे से बाहर निकालकर सृजनात्मकता से जोड़ने का प्रयास किया।
• साहित्यकार की मार्गदर्शक भूमिका ने बच्चों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की शक्ति को प्रोत्साहन दिया।
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