
नई दिल्ली। चुनाव सुधारों की दिशा में लगातार आवाज़ बुलंद करने वाले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के संस्थापक सदस्यों में से एक, प्रोफ़ेसर जगदीप छोकर का शुक्रवार तड़के हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे।
राजनीति में पारदर्शिता के पैरोकार माने जाने वाले छोकर, आईआईएम-अहमदाबाद के रिटायर प्रोफ़ेसर रहे थे। वर्ष 1999 में उन्होंने अपने सहयोगियों संग एडीआर की स्थापना की और चुनावी व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की मुहिम का नेतृत्व किया।
एडीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर उनकी निधन की सूचना साझा करते हुए लिखा—
“प्रोफ़ेसर छोकर का शुक्रवार सुबह 4 बजे निधन हो गया। उन्होंने अपने शरीर को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया था।”
संगठन ने उन्हें याद करते हुए कहा—
“एक सम्मानित शिक्षाविद, नागरिक कार्यकर्ता, वकील, इंजीनियर और संरक्षणवादी के रूप में प्रोफ़ेसर छोकर का जीवन लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा। सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता को बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता अविस्मरणीय है। वे केवल स्वच्छ राजनीति के पैरोकार ही नहीं, बल्कि उदार मार्गदर्शक, गहन चिंतक और गर्मजोशी से भरे साथी भी थे।”
गौरतलब है कि फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार दिया था। इस मामले में एडीआर प्रमुख याचिकाकर्ता था। इसके अलावा, अप्रैल 2024 में एडीआर की याचिका पर ही अदालत ने ईवीएम की जांच और सत्यापन के लिए नया सिस्टम लागू करने का आदेश दिया था।
प्रोफ़ेसर छोकर का जाना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
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