लंदन में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ उठी वैश्विक आवाज

 

लंदन/वॉशिंगटन। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के विरोध में शनिवार को लंदन स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया गया। ब्रिटेन में सक्रिय बंगाली हिंदू आदर्श संघ (बीएचएएस) यूके के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों और विभिन्न संगठनों ने भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने ‘जस्टिस फॉर हिंदूज़’ और ‘हिंदू लाइव्स मैटर’ जैसे नारे लगाए और शांतिपूर्ण तरीके से हनुमान चालीसा का पाठ किया। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, प्रदर्शन का उद्देश्य बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना था।

बीएचएएस यूके ने एक बयान में कहा कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में छात्र, पेशेवर, बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता, बच्चों के साथ माता-पिता और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मानवाधिकारों की रक्षा और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।

इस बीच, अमेरिका ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। वॉशिंगटन, 28 दिसंबर (आईएएनएस) के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में बांग्लादेश में हुई धार्मिक हिंसा की कड़ी निंदा की है। यह प्रतिक्रिया 27 वर्षीय हिंदू कपड़ा मजदूर दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या के बाद आई है, जिनकी 18 दिसंबर को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और बाद में शव को जला दिया गया था।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का समर्थन करता है तथा बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा सभी समुदायों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों का स्वागत करता है।

अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने इस हत्या को “भयानक” बताते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि धार्मिक नफरत और कट्टरता के ऐसे कृत्यों की कड़ी निंदा होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

इस घटना के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हाल के महीनों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा, तोड़फोड़ और धमकियों की घटनाओं में इज़ाफा हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है।

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