
फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह एक ऐसा अवसर बनकर सामने आया, जहां उपलब्धि, भावनाएं और भविष्य की उम्मीदें एक साथ मंच पर दिखाई दीं। डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की आंखों में आत्मविश्वास, गर्व और नए सपनों की चमक साफ झलक रही थी। वर्षों की मेहनत, शोध और संघर्ष उस क्षण साकार होते नजर आए जब विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया।

99 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि और 47 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किए जाने के दौरान सभागार में तालियों की गूंज केवल औपचारिक सम्मान की नहीं, बल्कि परिश्रम की स्वीकृति और भविष्य की संभावनाओं का उत्सव थी। विशेष रूप से छात्राओं की उल्लेखनीय सफलता—62 पीएचडी और 35 गोल्ड मेडल—ने समारोह को नारी शिक्षा और सशक्तिकरण का प्रतीक बना दिया।
सम्मान प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर मुस्कान के साथ यह भाव स्पष्ट था कि यह उपलब्धि उनके लिए केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज और संस्थान के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा है। कई विद्यार्थियों की आंखों में वह सपना झलक रहा था, जिसमें वे अपने ज्ञान को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं।
उसी क्षण शिक्षकों और संस्थान के पदाधिकारियों के चेहरे पर भी अलग ही संतोष और गर्व दिखाई दे रहा था। वर्षों तक विद्यार्थियों को गढ़ने वाले शिक्षकों के लिए यह क्षण अपने प्रयासों को सफल होते देखने जैसा था।

कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “दीक्षांत केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान को संस्कार और कर्म में रूपांतरित करने का पर्व है। शिक्षा का उद्देश्य अर्जन नहीं, अर्पण है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से सत्य, सेवा और संयम को जीवन का आधार बनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रो. सारंगदेवोत के शब्दों में शिक्षकों और पदाधिकारियों की वह भावना भी झलक रही थी, जो अपने विद्यार्थियों की सफलता को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।

विशिष्ट अतिथि प्रो. कैलाश सोडाणी, पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल के उच्च शिक्षा सलाहकार, ने कहा कि आत्मनिर्भर और आधुनिक मेवाड़ के निर्माण में शिक्षण संस्थानों, शोध और डिजिटल शिक्षा की निर्णायक भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि आज का शिक्षक केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मार्गदर्शक है।
संस्थान के अध्यक्ष प्रो. चेतन सिंह चौहान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और कहा कि भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय शुरू से ही वंचित और जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प पर कार्य कर रहा है।

प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़ ने जानकारी दी कि इस समारोह में 7 हजार से अधिक विद्या प्रचारिणी सभा के पदाधिकारी, सदस्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता वास्तव में संस्थान की वर्षों की शैक्षणिक साधना का परिणाम है।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. एन.एन. सिंह, विद्यापीठ के रजिस्ट्रार डॉ. तरुण श्रीमाली, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, पीजी डीन प्रो. प्रेमसिंह रावलोत, प्रो. जब्बर सिंह टाडावाडा, प्रो. दरियाव सिंह चुण्डावत, प्रो. एकलिंग सिंह झाला, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, कमलेश्वर सिंह सारंगदेवोत, ग्रुप कैप्टन गजेन्द्र सिंह, डॉ. रेणु राठौड़, भानु प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, यह दीक्षांत समारोह एक ऐसा जीवंत दृश्य बन गया जहां विद्यार्थियों ने अपने सपनों को साकार होते देखा, शिक्षकों ने अपने श्रम को सार्थक महसूस किया और संस्थान ने अपनी शैक्षिक परंपरा व सामाजिक दायित्व पर गर्व का अनुभव किया।

यही कारण है कि यह आयोजन केवल एक तिथि तक सीमित न रहकर, भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय की पहचान और विद्यार्थियों के जीवन की दिशा तय करने वाला प्रेरणादायी और स्मरणीय अध्याय बन गया।
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