
उदयपुर। राजस्थान पुलिस के जांबाज कमांडो, अमर शहीद प्रकाश के 15वें शहादत दिवस पर रविवार को बेदला रोड स्थित शहीद चौराहे पर श्रद्धा सुमन तो अर्पित किए गए, लेकिन वहां मौजूद हर आंख में सिस्टम के खिलाफ आक्रोश की चिंगारी साफ़ दिखाई दे रही थी। देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले एक वीर जवान की शहादत के डेढ़ दशक बीत जाने के बाद भी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है।
अमर शहीद प्रकाश समारोह समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र चौहान ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि शहादत के 15 वर्ष बाद भी शहीद को वह सम्मान नहीं मिला जिसका वह हकदार था। अपने प्राणों की आहुति देने वाले कमांडो प्रकाश की मूर्ति लगाने की स्वीकृति तक को सरकारी फाइलों और लालफीताशाही में दबा कर रखा गया है। क्या एक शहीद के सम्मान के लिए भी प्रशासन को सालों का वक्त चाहिए?
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर और बजरंग दल के संस्थापक कर्मेंद्र सिंह सहित कई प्रबुद्ध नागरिकों ने शिरकत की। नेताओं ने कड़े लहजे में कहा कि एक ओर हम देशभक्ति की बातें करते हैं और दूसरी ओर एक शहीद की प्रतिमा के लिए प्रशासन रोड़े अटका रहा है। बेदला गांव और उदयपुर शहर की जनता ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शहीद की मूर्ति लगाने की अनुमति नहीं मिली, तो यह मांग आंदोलन का रूप लेगी।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे पंच महासभा खटीक समाज के अध्यक्ष इंजी. भगवान प्रकाश चौहान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। कार्यक्रम में मौजूद दीपक शर्मा, जिनेंद्र शास्त्री, प्रताप सिंह राठौड़ और अन्य गणमान्य नागरिकों ने एक स्वर में कहा कि शहीद किसी जाति या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गौरव होता है। 15 साल का इंतजार शहीद के परिवार और समाज के सब्र का इम्तिहान है।
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