
उदयपुर। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर शनिवार को उदयपुर के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन प्लानर्स ऑफ इंडिया’ के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान के पूर्व अतिरिक्त नगर नियोजक सतीश कुमार श्रीमाली द्वारा किया गया।
प्रकृति रिसर्च सोसाइटी, उदयपुर के संस्थापक और अध्यक्ष प्रोफेसर पी.आर. व्यास ने मुख्य व्याख्यान (Keynote Address) दिया। उन्होंने ऐतिहासिक स्मारकों के साथ-साथ ‘जियो-हेरिटेज’ (Geo-heritage) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा : हमें केवल इमारतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वनों, प्राकृतिक झीलों, झरनों, पर्वत चोटियों, ग्लेशियरों और नदियों का भी संरक्षण करना होगा।
सांस्कृतिक विरासत : लोक गीत, लोक नृत्य, पारंपरिक कौशल और कला-सांस्कृतिक परंपराओं को ‘इको-टूरिज्म’ के माध्यम से जीवित रखना आवश्यक है।
ऐतिहासिक और पारिस्थितिक संसाधनों की रक्षा : राजस्थान के पूर्व वरिष्ठ नगर नियोजक श्री बी.एस. कानावत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। उन्होंने ऐतिहासिक किलों, मीनारों और हवेलियों के साथ-साथ पारिस्थितिक संसाधनों जैसे झरनों, बावड़ियों और झीलों की सुरक्षा पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि विरासत संरक्षण को शिक्षा प्रणाली और पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों में जागरूकता पैदा हो सके।
महत्वपूर्ण गतिविधियाँ और सदस्यता : स्वागत और अध्यक्षता: सेमिनार की अध्यक्षता श्री सतीश कुमार श्रीमाली ने की, जिन्होंने अतिथियों का स्वागत किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।
संस्था से जुड़ाव : सेमिनार के दौरान वरिष्ठ नगर नियोजक श्री बी.एस. कानावत औपचारिक रूप से प्रकृति रिसर्च सोसाइटी (PRSU) में शामिल हुए। प्रोफेसर व्यास ने श्री कानावत और श्री श्रीमाली को सदस्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। इनके साथ ही अन्य कई प्रतिभागियों ने भी सोसाइटी की सदस्यता ग्रहण की।
संवाद सत्र : कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच एक इंटरैक्टिव सत्र हुआ, जिसमें भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा की गई।
सेमीनार का समापन “पृथ्वी बचाओ और भावी पीढ़ी के लिए भविष्य सुरक्षित करो” के संकल्प के साथ हुआ।
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