महायुद्ध की शुरुआत : ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की पुष्टि; परिवार का खात्मा, इजराइल पर मिसाइल वर्षा और वैश्विक उबाल

तेहरान/वाशिंगटन/यरूशलेम

मध्य पूर्व एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ से वापसी का रास्ता नजर नहीं आता। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इस हमले ने न केवल ईरान के नेतृत्व को खत्म कर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) की आग में झोंक दिया है।

1. हमले का केंद्र और पारिवारिक क्षति

शनिवार को तेहरान के उच्च-सुरक्षा वाले पाश्चर (Pasteur) इलाके में भीषण विस्फोट हुए। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसियों—तसनीम और फार्स—ने पुष्टि की है कि हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, बहू और पोती भी मारी गई हैं। ईरान ने इस क्षति पर 40 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है।

2. ईरान का भीषण पलटवार और इराक का समर्थन

खामेनेई की मौत के तुरंत बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने “सबसे खतरनाक हमले” की चेतावनी दी।

  • इजराइल पर हमला: ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों और ड्रोनों की विशाल लहर दागी, जिसमें एक इजरायली महिला की मौत और 121 लोग घायल हुए। मिसाइलें तेल अवीव तक जा पहुँचीं।

  • क्षेत्रीय असर: इराक के शिया नेता मुक्तदा अल-सद्र ने इराक में 3 दिन के शोक की घोषणा करते हुए इसे “अत्यधिक दुखद” बताया है।

3. डोनाल्ड ट्रंप और ‘न्याय’ का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को “ऐतिहासिक न्याय” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि अब ईरान के साथ कूटनीति “बेहद आसान” हो गई है क्योंकि वे बुरी तरह हार रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के भीतर ही ट्रंप के खिलाफ विरोध की लहर उठ गई है। न्यूयॉर्क और वाशिंगटन में हजारों लोग इसे “अवैध और असंवैधानिक युद्ध” बताकर सड़कों पर उतर आए हैं।

4. ईरान में दो फाड़: मातम और जश्न

ईरान के भीतर से विरोधाभासी तस्वीरें सामने आ रही हैं:

  • शोक: मशहद और तेहरान की सड़कों पर हजारों समर्थक काले कपड़े पहनकर रोते-बिलखते अपने नेता को विदाई दे रहे हैं।

  • जश्न: दूसरी ओर, हालिया हफ्तों में हुए दमन से नाराज प्रदर्शनकारियों ने तेहरान के कई हिस्सों में आतिशबाजी की और जश्न मनाया।

5. वैश्विक महाशक्तियों की चिंता (चीन का रुख)

चीन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बताया है। बीजिंग को डर है कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) से वैश्विक ऊर्जा बाजार (तेल की आपूर्ति) बाधित होगा और अमेरिका का दबदबा बढ़ जाएगा, जो चीन के रणनीतिक हितों के खिलाफ है।

6. कूटनीति को धोखा?

विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला जानबूझकर तब किया गया जब ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता सफल होने के करीब थी। विशेषज्ञों ने इसे ‘नेतनयाहू का युद्ध’ करार दिया है, जो अमेरिकी हितों से ज्यादा इजरायल के क्षेत्रीय दबदबे को सुरक्षित करता है।


वर्तमान स्थिति: ईरान की सेना किसी भी वक्त मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले कर सकती है। पूरी दुनिया की नजरें अब अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार और ईरान के अगले सर्वोच्च नेता (Successor) की घोषणा पर टिकी हैं।

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