
नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों में ऊर्जा और प्रेरणा फूंकने के लिए आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक विशेष संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश को संदेश दिया है कि निरंतर प्रयास, अटूट धैर्य और दृढ़ संकल्प की शक्ति से जीवन के बड़े-से-बड़े लक्ष्यों को भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने गर्व जताते हुए कहा कि आज भारत का हर एक नागरिक इसी सकारात्मक भावना से प्रेरित होकर देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना योगदान दे रहा है।
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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया सुभाषितम्
“यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात् ।
अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते ।।”
क्या है इस श्लोक का अर्थ?
भारतीय संस्कृति के इस अनमोल सुभाषितम् का सीधा और गहरा संदेश यह है कि:
जो व्यक्ति जिस भी श्रेष्ठ लक्ष्य की कामना या इच्छा करता है, और उसे हकीकत में बदलने के लिए बिना थके निरंतर और क्रमबद्ध (Step-by-Step) प्रयास करता है, वह उस लक्ष्य को निश्चित रूप से हासिल कर लेता है।
सफलता की एकमात्र शर्त यह है कि व्यक्ति को रास्ते में आने वाली बाधाओं से घबराकर, बीच में हार मानकर अपने मार्ग से पीछे नहीं हटना चाहिए।
“इसी भावना से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा भारतवर्ष”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों की सराहना करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा:
“निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े-से-बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।”
यह संदेश न केवल देश के युवाओं और विद्यार्थियों में नया जोश भरेगा, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में एक सामूहिक राष्ट्र-शक्ति के रूप में काम करेगा।
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