
फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में विश्व प्रसिद्ध मेवाड़ महोत्सव का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव ने शहर को लोक संस्कृति और परंपराओं के रंगों से सराबोर कर दिया।
प्रमुख आकर्षण : गणगौर की शाही सवारी
पुराने शहर के घंटाघर से गणगौर घाट तक विभिन्न समाजों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में गणगौर की सवारियां निकाली गईं। महोत्सव का मुख्य आकर्षण बंशी घाट से गणगौर घाट तक निकली शाही गणगौर सवारी रही, जिसने पिछोला झील की लहरों के बीच राजसी वैभव की यादें ताजा कर दीं।

प्रतियोगिता और सम्मान : श्रृंगार और पारंपरिक वेशभूषा के आधार पर गणगौर प्रतिमाओं को पुरस्कृत भी किया गया। प्रथम स्थान : राजमाली समाज। द्वितीय स्थान : मारू कुमावत समाज। तृतीय स्थान : कहार भोई समाज।

सांस्कृतिक संध्या और आतिशबाजी
शाम को गणगौर घाट पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुनीता सरोच और उपनिदेशक शिखा सक्सेना ने अतिथियों का स्वागत किया।
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शहर विधायक ताराचंद जैन और पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन सहित कई गणमान्य नागरिक इस अवसर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन आकाश में गूंजती शानदार आतिशबाजी के साथ हुआ।
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