
उदयपुर। भटियाणी चौहट्टा स्थित लक्ष्मी नारायण जी के मंदिर परिसर में गुरुवार को तुलसी पूजन का पावन आयोजन हुआ, जहां नेशन फर्स्ट के तत्वावधान में तुलसीजी के पौधों का वितरण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित अश्विनी कुमार भट्ट द्वारा विधिवत पूजा और आरती से हुई। श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण भक्ति के साथ तुलसीजी के पौधों को भगवान के चरणों में अर्पित किया। इसके बाद पौधों का वितरण कर हर परिवार को जीवन में तुलसी के महत्व और प्रकृति से जुड़ने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर संयोजक एडवोकेट अशोक सिंघवी ने कहा कि आज के समय में जहां लोग स्वकेन्द्रित होते जा रहे हैं, वहां राष्ट्र और प्रकृति का सर्वोपरि महत्व समझना अनिवार्य है। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा, “जब हर नागरिक के हृदय में राष्ट्र और प्रकृति की भावना स्थिर होगी, तभी देश और पृथ्वी का कल्याण संभव है।”
वक्ताओं ने कहा कि तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक है। जैसे तुलसी हमारे घरों को पवित्र करती है, वैसे ही पहाड़, जंगल और नदियाँ पृथ्वी को जीवनदायिनी ऊर्जा से भरती हैं।
कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों ने विशेष रूप से अरावली पर्वतमाला के संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम पत्र पर हस्ताक्षर कर यह संदेश दिया कि पहाड़ पृथ्वी की रीढ़ हैं और उनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है। वक्ताओं ने भावपूर्ण शब्दों में कहा, “पृथ्वी माता समान है और प्रकृति उसका शृंगार, जिसे बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
पौधे उपलब्ध कराने में वृक्षम अमृतम के यशवन्त त्रिवेदी का सहयोग उल्लेखनीय रहा। कार्यक्रम में एडवोकेट विजय ओसवाल, मनोज अग्रवाल, निमेष भट्ट, राजेंद्र धाकड़, समाजसेवी हरीश नरसावत, अभिषेक वैष्णव, रुद्रांश सहित कई ने भावपूर्ण योगदान दिया।
इस प्रकार तुलसी पूजन न केवल धार्मिक परंपरा का उत्सव बना, बल्कि प्रकृति संरक्षण और अरावली पर्वतमाला को बचाने की भावना का भी दिव्य संदेश बनकर सामने आया।
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