
गंदगी का हवाला देकर मेले पर लगाई थी रोक, पूर्व पार्षदों और शहरवासियों के भारी विरोध के बाद नगर निगम को वापस लेना पड़ा फैसला
उदयपुर। सावन मास के दौरान गुलाबबाग में लगने वाले ऐतिहासिक एवं पारंपरिक ‘सुखिया सोमवार’ के मेलों पर बंदिशें लगाने का प्रशासनिक फैसला अंततः जन-आक्रोश के आगे टिक न सका। चौतरफा विरोध, जनाक्रोश और जनप्रतिनिधियों की कड़ी आपत्ति के बाद प्रशासन को झुकना पड़ा और मेले के आयोजन की पुनः इजाजत दे दी गई है।
सावन के प्रत्येक सोमवार को गुलाबबाग में सजलने वाला यह मेला उदयपुर की लोक-संस्कृति, धार्मिक परंपरा और जन-मनोरंजन का वर्षों पुराना केंद्र रहा है। हाल ही में नगर निगम व स्थानीय प्रशासन ने “मेले के कारण गुलाबबाग में गंदगी फैलने” का हवाला देकर इस आयोजन पर रोक लगा दी थी।
प्रशासन के इस तर्क पर तीखा हमला बोलते हुए शहरवासियों ने सवाल उठाया था कि शहर में सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन (Waste Management) बनाए रखना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अपनी नाकामी और लापरवाही को छिपाने के लिए सदियों पुरानी परंपरा और गरीबों के रोज़गार पर गदा चलाना सरासर गलत था।
मेले पर रोक की खबर फैलते ही पूर्व पार्षद दिनेश गुप्ता, गौरव प्रताप सिंह और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक व छोटे व्यापारी मौके पर एकत्रित हो गए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट चेतावनी दी थी कि परंपराओं और जन-भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की तैनाती कर मेले की अनुमति नहीं दी गई, तो शहरवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। विरोध को देखते हुए शहर विधायक ताराचंद जैन, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, कांग्रेस जिला अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़, भाजपा नेता जगदीश शर्मा, ओम प्रकाश खोखावत आदि मौके पर पहुंचे। इस बारे में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से भी बात की गई।
जनता के आक्रोश और विरोध-प्रदर्शन के दबाव को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने अपने फैसले पर पुनर्विचार किया और अतिरिक्त सफाई व्यवस्था के दिशा-निर्देशों के साथ मेले के आयोजन की स्वीकृति जारी कर दी। विक्रेताओं को पीडब्ल्यूडी वाले गेट से एंट्री होगी।
इस फैसले से सावन में रोज़गार की आस लगाए बैठे सैकड़ों रेहड़ी-पटरी वालों, खिलौने-झूले विक्रेताओं और स्थानीय कारीगरों ने राहत की सांस ली है। साथ ही शहरवासियों और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं में भी इस सुखद निर्णय से भारी उत्साह है।
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