उदयपुर। जनता के लंबे संघर्ष के बाद आखिर गुलाबबाग में बच्चों की ट्रेन चल ही गई। निगम के पार्षद इसमें सफर कर खूब आनंद ले रहे हैं। लेना भी चाहिए। उनकी मेहनत रंग लाई है। लेकिन, जो पार्षद या जिम्मेदार इस ट्रेन का सफर कर वाहवाही लूट रहे हैं क्या उन्होंने अपने वार्ड की समस्याओं का जायजा लिया है। अब तक सिटी स्मार्ट बन चुकी है…लेकिन स्मार्ट सिटी में होने वाली परेशानियों को कौन दूर करेगा। उदयपुर इन दिनों नया रिकॉर्ड बना रहा है?
1. देश की ऐसी स्मार्ट सिटी जहां सबसे ज्यादा बिजली गुल होती है।
2. ऐसी समार्ट सिटी जहां स्मार्ट नालियों के ढक्कन बदलने और उसे दुरस्त करने में सालों लग जाते हैं।
3. सीवरेज और स्मार्ट नालियों से बहने वाले पानी को रोकने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
4. स्मार्ट सिटी पर खर्च हुए करोड़ों रुपए का हिसाब कौन देगा? क्या वाकई में लोगों को कुछ सुविधा मिल रही है या वैसे ही?
5. गुलाबबाग में चलने वाली नई ट्रेन में अब निगम के भ्रष्टाचार के पोस्टर भी चस्पा होने चाहिए, जैसे 272 भूखंड प्रकरण, गैराज में बाइक प्रकरण आदि।
एमबी अस्पताल : तीन एलईडी से जनता को क्या सुविधा मिलेगी?
उदयपुर के एमबी अस्पताल में सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए तीन एलईडी लगाई गई। तमाम अधिकारी ने इन एलईडी के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवाए हैं, लेकिन क्या इससे अस्पताल की समस्याएं कम होगी?
1. क्या यहां आने वाले मरीजों को इमरजेंसी में वार्ड बॉय, व्हीलचेयर, स्ट्रेचर बिना किसी के इंतजार के मिल जाएगा?
2. क्या एलईडी लगाने से वार्डों में जांच सुविधा और डॉक्टरों व नर्सिंग की उपस्थिति शत प्रतिशत हो जाएगी?
3. क्या अब लोगों को दवाई व जांच रिपोर्ट लेने के लिए लंबी कतार में नहीं लगना पड़ेगा?
झीलों में अब भी क्यों गिर रहे हैं नाले
केंद्र सरकार ने फतहसागर और पीछोला के विकास पर 141 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस राशि का उपयोग पाल पर तो दिखाई देता है, लेकिन झीलों में गिरने वाले गंदे नालों को रोकने में कहीं भी दिखाई नहीं देता है। झीलों के आसपास पहाड़ों को लगातार काटा जा रहा है। बिना इजाजत निर्माण हो रहा है। कोई जिम्मेदार जवाब नहीं दे पा रहे हैं। झीलों के फिक्रमंद शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया भी राज्यपाल बन चुके हैं, लेकिन उनके अधीन काम करने वाला नगर निगम बोर्ड क्या अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
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