फोटो : कमल kumawat

सैयद हबीब, उदयपुर।
उदयपुर की नगर सरकार के चुनावी समर में वार्ड 25 का अखाड़ा इस बार बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला बन चुका है। कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी निवर्तमान पार्षद डॉ. नेहा कुमावत पर दांव खेलकर मैदान में उतारा है, तो दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने नए चेहरे के रूप में लोकेश साहू को आगे कर बिसात बिछाई है।
लोकेश साहू भले ही निगम चुनाव की दहलीज पर पहली बार कदम रख रहे हों, मगर उनके पीछे पूर्व पार्षद सिद्धार्थ शर्मा और उनके रसूखदार परिवार की पूरी सियासी ताकत खड़ी है। खुद शहर विधायक ताराचंद जैन ने वार्ड की तंग गलियों और चौपालों में उतरकर मतदाताओं से सीधा राब्ता कायम किया है, जिससे यह साफ है कि भाजपा इस सीट को अपनी झोली में डालने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती।

परिसीमन का फेर और कसौटी पर पांच साल का हिसाब
नए वार्ड परिसीमन के चलते इलाके का जातीय और मोहल्लावार गणित कुछ बदला जरूर है। नए मतदाताओं के जुड़ने और पुराने समीकरणों के बिखरने से कांग्रेस के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। ऐसे में डॉ. नेहा कुमावत की यह चुनावी जंग दरअसल उनके पिछले पांच साल के कामकाज और जनता के बीच उनकी मौजूदगी की सीधी अग्निपरीक्षा है।
मृदुभाषी और सहज स्वभाव की युवा नेत्री नेहा कुमावत रक्षात्मक होने के बजाय सीधे अपने काम की बुनियाद पर वोट मांग रही हैं। वे बड़ी संजीदगी और ईमानदारी से कहती हैं:
“मैं कोई हवाई या शत-प्रतिशत काम करने का झूठा दावा नहीं करती। पुराने 70 वार्डों में कोई एक पार्षद ऐसा नहीं मिलेगा जिसने सौ फीसदी काम पूरे कर दिए हों। न ही मैं यह दावा करती हूं कि हर एक शख्स मुझसे पूरी तरह खुश ही होगा, लेकिन एक बात सीना ठोक कर कह सकती हूं—पांच साल में ऐसा कोई गलत काम नहीं किया जिससे किसी का दिल दुखे या नाराजगी हो। आधी रात को भी जब किसी वार्डवासी ने आवाज दी, मैं दरवाजे पर हाजिर मिली। बाकी बचे अधूरे काम अगले कार्यकाल में पूरे किए जाएंगे।”
तीस बरस के भाजपाई राज पर तीखा तंज
भाजपा के दावों को सीधे कठघरे में खड़ा करते हुए डॉ. नेहा कुमावत ने तीखा सियासी तीर छोड़ा है। वे सवाल करती हैं कि उदयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड पिछले तीस वर्षों से काबिज है; क्या इन तीन दशकों में शहर की समस्याएं खत्म हो गईं? क्या जनता की तकलीफें दूर हो गईं?
एक तरफ भाजपा का पुराना सांगठनिक ढांचा, विधायक की सक्रियता और पूर्व पार्षद की साख है, तो दूसरी तरफ एक युवा महिला पार्षद का पांच साल का जमीनी संपर्क और सीधा जनसंवाद। अब देखना यह है कि वार्ड 25 का प्रबुद्ध मतदाता दलगत राजनीति से प्रभावित होता है या अपने सुख-दुख में काम आने वाले चेहरे पर दोबारा ऐतबार जताता है।
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