उदयपुर। शहर में मंगलवार को इस वक्त सियासत गरमा गई, जब बीजेपी के कट्टर समर्थक व पदाधिकारी रहे राजकुमार फत्तावत के निवास पर कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया का स्वागत किया गया। इस मौके पर जैन समाज के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसमें आलोक पगारिया प्रमुख नाम है।
उदयपुर से पिछले 20 सालों से लगातार विधायक रहे गुलाबचंद कटारिया के असम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद बीजेपी में तो खलबली है ही, जैन समाज में भी सियासत को लेकर उठापटक हो रही है। बीजेपी के कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं का झुकाव भी कटारिया की गैर मौजूदगी में कांग्रेस की तरफ दिखाई दे रहा है। खैर, फत्तावत की छवि सामाजिक भी रही है।
इसकी खास वजह यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जाने वाले डूंगरपुर के निवासी दिनेश खोड़निया का कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रबल दावेदारी की जा रही है। इससे बीजेपी के जैन दावेदारों को बड़ा झटका लग सकता है। इसके मायने यह भी हो सकते हैं कि जिनके नाम बीजेपी में चल रहे हैं, उन पर सभी की एक राय नहीं है।
कांग्रेस में भी खुद को दावेदार बताने वाले छोटे बड़े नेता भी हमेशा की तरह अवसर की तलाश में अब खोड़निया के चरणों में आ गए हैं। यह उनकी ईमानदारी का एक उदहारण है।
खोड़निया के लिए उदयपुर से चुनाव जीतना उतना आसान नहीं है, जितना उनके समर्थक उन्हें सब्जबाग दिखा रहे हैं। मैं पहले भी बता चुका हूं कि गुलाबचंद कटारिया ने सिर्फ जैन समाज के वोटों से ही चुनाव नहीं जीते। कटारिया उदयपुर में मोहनलाल सुखाडिया के बाद पहले सर्वमान्य नेता बने। उन्हें जैन समाज के साथ सभी समाजों के वोट मिलते रहे हैं। उन्हें मुस्लिम और बोहरा समाज के भी अच्छे खासे वोट मिलते थे। यही वजह है कि दावेदारों की इस लड़ाई में अब उदयपुर के लोग चाहते हैं कि उनके शहर का विधायक कटारिया जैसा हो। इसके लिए कुछ समाज के लोगों ने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।
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