मेवाड़ की विरासत में नवाचार की गूंज : डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने दी युवा कला को नई उड़ान

उदयपुर। जब ऐतिहासिक दीवारें आधुनिक सृजन की गवाह बनती हैं, तो वह केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण होता है। उदयपुर के सिटी पैलेस संग्रहालय में हाल ही में आयोजित कला प्रदर्शनी ‘कनक’ इसी बदलाव का प्रतीक बनी। महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने इस अवसर पर युवा प्रतिभाओं को तराशने के संकल्प को पुनः दोहराया।

कला : जहां सीमाएं समाप्त होती हैं

इस प्रदर्शनी के केंद्र में रहे प्रतिभाशाली कलाकार स्पर्श दोशी। स्पर्श की कला साधारण नहीं है; एक दृष्टिबाधित कलाकार के रूप में उन्होंने सिद्ध किया कि सृजन के लिए दृष्टि से अधिक ‘दृष्टिकोण’ की आवश्यकता होती है।

चुंबकीय सृजन (Magnetic Art) : स्पर्श चुंबकीय गेंदों (Magnetic Spheres) के माध्यम से ऐसी जटिल और गणितीय सटीकता वाली कलाकृतियां रचते हैं, जो तर्क और सौंदर्य का अद्भुत मेल हैं।

नवाचार और परंपरा : सिटी पैलेस जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इस आधुनिक और तकनीकी कला का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि मेवाड़ की भूमि नवाचार (Innovation) के लिए कितनी उदार है।

“युवा प्रतिभाओं को संबल देना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी”

प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने स्पर्श दोशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कला को समाज का दर्पण बताते हुए महत्वपूर्ण विचार साझा किए:

“मेवाड़ का इतिहास सदियों से कला और कलाकारों के संरक्षण का रहा है। आज के दौर में हमारा यह दायित्व है कि हम स्पर्श जैसे ऊर्जावान और दृढ़निश्चयी युवाओं को वह मंच प्रदान करें, जहां उनकी प्रतिभा वैश्विक पहचान बना सके। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है।”

समर्पण और प्रेरणा का संगम

इस प्रदर्शनी की सफलता के पीछे स्पर्श के माता-पिता, हार्दिक दोशी एवं भूमि दोशी का अटूट समर्पण भी उभर कर आया। डॉ. मेवाड़ ने उनके योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवार का सहयोग ही किसी कलाकार की सबसे बड़ी शक्ति होती है।

कला, बुद्धि और अनुशासन का उत्सव
‘कनक’ प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि कला केवल कोरी कल्पना नहीं है, बल्कि यह गणितीय गणना, अनुशासन और असीम संभावनाओं की अभिव्यक्ति है। सिटी पैलेस के ऐतिहासिक वातावरण में इस आयोजन ने कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह सिद्ध किया कि डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के नेतृत्व में मेवाड़ की कला-संस्कृति आज के युवाओं के हाथों में न केवल सुरक्षित है, बल्कि नित नए आयाम छू रही है।

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