
उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव 2025 के पांचवें दिन गुरुवार को लोकसंस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। मुक्ताकाशी मंच पर ओडिशा के प्रसिद्ध गोटीपुआ नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नारी वेश में सजे बाल कलाकारों ने भक्ति, लावण्य और एक्रोबेटिक्स के अद्भुत समन्वय से भगवान जगन्नाथ को रिझाते हुए ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा शिल्पग्राम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गोटीपुआ नृत्य में कलाकारों द्वारा किए गए रोमांचक करतब, पिरामिड निर्माण और भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं ने दर्शकों को चकित कर दिया। भक्ति और शक्ति के इस अनोखे संगम ने उत्सव की थीम ‘लोक के रंग–लोक के संग’ को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में अन्य राज्यों की प्रस्तुतियों ने भी समां बांध दिया। गुजरात का गरबा, जम्मू का डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान का सहरिया स्वांग व सफेद आंगी गेर, गोवा का नाविकों पर आधारित लोकनृत्य, त्रिपुरा का संतुलन से भरा होजागिरी नृत्य तथा ओडिशा का संभलपुरी नृत्य दर्शकों की खूब सराहना बटोरता रहा। महाराष्ट्र के मल्लखंभ कलाकारों के हैरतअंगेज करतबों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया, वहीं हरियाणा की घूमर और राजस्थान के लोकदेवता गोगाजी को समर्पित डेरू नृत्य को भी भरपूर तालियां मिलीं।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल का नटुआ लोकनृत्य, छत्तीसगढ़ की पंडवानी गायन परंपरा और थांगटा-स्टिक जैसे मार्शल आर्ट आधारित लोकनृत्य भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी और मोहिता दीक्षित ने किया।
‘हिवड़ा री हूक’ में दिखी दर्शकों की भागीदारी
बंजारा मंच पर चल रहे ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम में मेलार्थियों ने गीत, कविता और संवाद के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। को-ऑर्डिनेटर सौरभ भट्ट की प्रश्नोत्तरी में भी सभी आयु वर्ग के दर्शकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेताओं को मौके पर ही पुरस्कार प्रदान किए गए।
थड़ों पर दिनभर लोक रंगों की बहार
शिल्पग्राम के विभिन्न थड़ों पर सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक लोक प्रस्तुतियों का सिलसिला चलता रहा। कच्ची घोड़ी, बीन-जोगी, गवरी, गरबा, चकरी, बाजीगर, पोवाड़ा, मसक वादन, मांगणियार गायन, गोंधल, घूमट, कठपुतली और सुंदरी जैसी प्रस्तुतियों ने मेलार्थियों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं, बहरूपियों की टोलियां और परिसर में लगी पत्थर की कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं और पसंदीदा सेल्फी प्वाइंट भी साबित हुईं।
शिल्पग्राम उत्सव में हर दिन लोकसंस्कृति की नई झलक देखने को मिल रही है, जहां परंपरा, कला और उत्सव एक-दूसरे में घुलते नजर आ रहे हैं।
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