
उदयपुर। कन्हैयालाल हत्याकांड, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था, अब एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मुद्दा है जावेद नामक आरोपी की जमानत। हाईकोर्ट ने उसे साजिश के आरोप से जुड़ी सुनवाई के दौरान जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया, जिससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं बल्कि जांच एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यह दूसरा मौका है जब इस मामले में किसी आरोपी को जमानत मिली है, और यह स्थिति फिर राजनीति को जन्म दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस जमानत को लेकर कड़ी आलोचना करते हुए एनआईए की जांच पर उंगली उठाई है। उन्होंने न केवल जांच एजेंसी पर सवाल किए, बल्कि सीधे तौर पर बीजेपी और उनके वरिष्ठ नेताओं की मंशा पर भी शक जताया है। गहलोत ने कहा कि जब ऐसे संगीन मामलों में आरोपी रिहा हो रहे हैं, तो यह जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
गहलोत का यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की एक नई लहर को जन्म दे सकता है, खासकर तब जब देशभर में इस केस को सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता के प्रतीक के रूप में देखा गया है। एनआईए, जो अब तक देश की शीर्ष जांच एजेंसी मानी जाती थी, उसकी भूमिका अब सवालों के घेरे में है। क्या जांच में कमी रही, या फिर राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ? ये सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुके हैं।
इस जमानत के बाद आम जनता में भी आक्रोश है, क्योंकि कन्हैयालाल की निर्मम हत्या ने उस समय समाज को दहला कर रख दिया था। अब आरोपी को जमानत मिलने से पीड़ित परिवार और समाज के बीच न्याय की उम्मीदें धुंधली पड़ने लगी हैं।
अशोक गहलोत का यह तंज भी कम दिलचस्प नहीं कि जब बीजेपी सुरक्षा और न्याय की बात करती है, तब ऐसे आरोपियों को रिहा किया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि क्या एनआईए इस सवालों का सामना कर सकेगी, या फिर इसे राजनीतिक मुद्दे में बदलने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा है-कन्हैयालाल हत्याकांड में शामिल रहे एक आरोपी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई।
उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड का भाजपा ने चुनावी लाभ लेने के लिए राजनीतिक इस्तेमाल किया परन्तु केन्द्र की भाजपा सरकार की NIA ने दोषियों को सजा देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। 28 जून 2022 को हुए इस घटनाक्रम की रात को ही NIA ने ये केस ले लिया पर करीब ढाई साल बीतने के बाद दोषियों को सजा नहीं दी जा सकी। राज्य की भाजपा सरकार ने भी जल्दी सजा के लिए कोई दबाव नहीं बनाया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह ने चुनावी प्रचार में इस घटना का खूब इस्तेमाल किया और भाजपा ने पीड़ित परिवार को दिए गए मुआवजे की राशि 50 लाख रुपए को 5 लाख रुपए बताकर झूठ फैलाया और राजनीतिक लाभ लिया। राजस्थान की जनता और पीड़ित परिवार पूछ रहे हैं कि भाजपा इस घटना का केवल राजनीतिक फायदा ही लेगी या न्याय दिलाने का भी प्रयास करेगी। जनता ये नहीं भूली है कि इस हत्याकांड के दो मुख्य आरोपी भाजपा के कार्यकर्ता थे और भाजपा नेता उनकी सिफारिश के लिए थाने में फोन किया करते थे।
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