लीला पैलेस उदयपुर पर 10 लाख रुपये का जुर्माना, निजता भंग करने का मामला, 55 हजार रुपये किराया लौटाने के आदेश


उदयपुर/चेन्नई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, चेन्नई (नॉर्थ) ने लीला पैलेस उदयपुर को एक चेन्नई निवासी दंपती को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। आयोग ने माना कि होटल के हाउसकीपिंग स्टाफ ने मास्टर-की का इस्तेमाल कर कब्जे वाले कमरे में घुसकर मेहमानों की निजता का उल्लंघन किया।

आयोग ने 16 दिसंबर को दिए गए अपने आदेश में होटल को 26 जनवरी 2025 (घटना की तारीख) से राशि की वसूली तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 55,000 रुपये का रूम टैरिफ लौटाने के भी आदेश दिए। इसके अलावा होटल को 10,000 रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर भी अदा करने होंगे। आयोग ने पूरी राशि दो महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला

शिकायत चेन्नई की एक अधिवक्ता ने दर्ज कराई थी, जिन्होंने 26 जनवरी 2025 को एक दिन के ठहराव के लिए लीला पैलेस उदयपुर में “ग्रैंड रूम विद लेक व्यू” बुक किया था। शिकायत के अनुसार, होटल का एक हाउसकीपिंग कर्मचारी मास्टर-की का इस्तेमाल करते हुए उस समय कमरे में दाखिल हो गया, जब वह और उनके पति वॉशरूम में थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि “नो सर्विस” चिल्लाने के बावजूद कर्मचारी कमरे में घुस आया और टूटे हुए वॉशरूम दरवाजे से झांकने लगा। उन्होंने इसे निजता पर गंभीर हमला बताते हुए मानसिक पीड़ा पहुंचाने वाला कृत्य बताया।

आयोग की सख्त टिप्पणी

आयोग ने इस घटना को सेवा में कमी और निजता के उल्लंघन का मामला मानते हुए कहा कि केवल आंतरिक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के आधार पर हाउसकीपिंग स्टाफ को किसी कब्जे वाले कमरे में मास्टर-की से प्रवेश करने का अधिकार नहीं है।

आयोग ने कहा, “दरवाजा खटखटाने के एक मिनट से भी कम समय में मास्टर-की से प्रवेश करना न केवल अनुचित है, बल्कि असुरक्षित भी है, खासकर तब जब कमरा कब्जे में हो और वॉशरूम का उपयोग किया जा रहा हो।”

आयोग ने यह भी कहा कि यदि कमरे के अंदर से कोई जवाब न मिले, तो कर्मचारियों को रिसेप्शन से यह पुष्टि करनी चाहिए थी कि मेहमान मौजूद हैं या चेक-आउट कर चुके हैं, न कि मास्टर-की का इस्तेमाल कर कमरे में प्रवेश करना चाहिए था।

होटल का बचाव नामंजूर

लीला पैलेस ने किसी भी तरह की गलती से इनकार करते हुए दावा किया कि कर्मचारी ने पहले डोरबेल बजाई थी और कमरे में “डू नॉट डिस्टर्ब” का बोर्ड नहीं लगा था। होटल का यह भी कहना था कि दरवाजे की कुंडी या डबल लॉक नहीं लगाया गया था और मेहमानों के अंदर होने का पता चलते ही कर्मचारी तुरंत बाहर निकल गया।

हालांकि, आयोग ने होटल के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि आंतरिक SOP मेहमानों के मौलिक अधिकार—निजता और सुरक्षा—से ऊपर नहीं हो सकते। आयोग ने उसी दिन जारी किए गए होटल के लिखित माफी-पत्रों को भी अहम सबूत माना।

आयोग ने कहा, “हालांकि होटल इन्हें ‘गुडविल जेस्चर’ बता रहा है, लेकिन घटना वाले दिन जारी की गई लिखित माफियां स्थिति को संभालने में हुई चूक और विफलता को स्वीकार करती हैं। उपभोक्ता न्यायशास्त्र में ऐसे स्वीकारोक्ति वाले दस्तावेजों का साक्ष्य मूल्य होता है।”

सीसीटीवी पर भी सवाल

आयोग ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने में देरी पर भी नाराजगी जताई और यह भी रेखांकित किया कि कमरे के बाहर लगा कैमरा काम नहीं कर रहा था, जिससे मेहमानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

यह शिकायत श्लॉस उदयपुर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई थी, जो लीला पैलेस, उदयपुर का संचालन करती है।

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