लोकसभा आम चुनाव : 2024भवन मालिक की अनुमति के बिना नहीं लगा सकेंगे झण्डे-बैनर


आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों की करनी होगी पालना
– उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
उदयपुर। लोकसभा आम चुनाव- 2024 की घोषणा के साथ ही चुनावी रंगत भी जमने लगी है। फिलहाल चुनावी माहौल चर्चाओं तक सीमित है, लेकिन आने वाले कुछ ही दिनों में प्रचार-प्रसार जोर पकड़ेगा। ऐसे में राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों के साथ ही आमजन को आदर्श आचार संहिता की पालना भी करनी होगी। आचार संहिता के उल्लंघन पर संबंधितों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम तथा अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
जिला निर्वाचन अधिकारी (कलक्टर) अरविंद पोसवाल ने बताया कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशानुसार सभा-रैली के आयोजन से पूर्व सक्षम स्तर से स्वीकृति लेनी होगी। इसमें मैदान,  पार्क, खेल मैदान के उपयोग के लिए सभी को समान अधिकार रहेगा। सार्वजनिक संपत्तियों पर दीवार लेखन, चुनाव सामग्री यथा बैनर, झंडे, होर्डिंग प्रदर्शित नहीं किए जा सकेंगे। इसके लिए निर्धारित स्थल चिह्नित कर पहले आओ पहले आओ की तर्ज पर स्थान आवंटित किए जाएंगे।
आचार संहिता अनुपालना प्रकोष्ठ के प्रभारी जितेन्द्र ओझा ने बताया कि राज्य परिवहन की बसों एवं सरकारी स्वामित्व वाले वाहनों का उपयोग राजनीतिक विज्ञापन के लिए नहीं किया जाएगा। एक पार्टी अथवा उम्मीदवार के अधिकतम 3 झंडे प्रदर्शित किए जा सकते हैं। यदि कोई एक से अधिक पार्टी या उम्मीदवार के झंडे प्रदर्शित करना चाहता है, तो यह प्रत्येक पार्टी या उम्मीदवार के केवल एक ध्वज का उपयोग अनुमत रहेगा। झंडे का आकार भी निर्धारित रहेगा। किसी भी वाहन पर बैनर लगाने की अनुमति नहीं है। रोड शो के दौरान 6 फीट गुणा 4 फीट के अधिकतम आकार के बैनर को हाथ से ले जाने की अनुमति दी गई। एक वाहन पर उचित आकार के 1 या 2 छोटे स्टिकर की अनुमति है। वाहन पर कोई स्पॉट फोकस, फ्लैशिंग या सर्च लाइट, हूटर की अनुमति नहीं है।
ओझा ने बताया कि निजी परिसर में ध्वज या बैनर संबंधित भवन मालिक की स्वीकृति से ही लगाया जा सकता है। जहां विशिष्ट राज्य अथवा स्थानीय कानून मौजूद है, उसी के प्रावधान लागू किए जाएंगे। निजी वाहन पर झंडे और स्टिकर सही तरीके से लगाए जा सकेंगे, जिससे वे अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए असुविधा या बाधा उत्पन्न नहीं करें। वाणिज्यिक वाहनों पर चुनाव सामग्री के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, जब तक कि वाहन का चुनाव प्रचार के लिए वैध रूप से उपयोग नहीं किया जा रहा हो।

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