महाराणा प्रताप जयंती पर मुस्लिम महासंघ की अनूठी पहल : हल्दीघाटी में सेनापति हकीम खां सूरी की मजार पर पेश की चादर शरीफ, दिया राष्ट्रभक्ति का संदेश

खमनोर/उदयपुर। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के पावन अवसर पर मुस्लिम महासंघ द्वारा कौमी एकता और अटूट राष्ट्रभक्ति की एक अद्भुत मिसाल पेश की गई है। महासंघ की ओर से ऐतिहासिक युद्ध भूमि हल्दीघाटी स्थित रक्त तलाई में महाराणा प्रताप के अग्रिम दस्ते के मुख्य सेनापति रहे ‘हकीम खां सूरी’ की मजार पर पूरी अकीदत (श्रद्धा) के साथ चादर शरीफ पेश की गई और उन्हें ‘खिराज-ए-अकीदत’ (भावभीनी श्रद्धांजलि) अर्पित की गई।

इस गौरवमयी आयोजन के अवसर पर मुस्लिम महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद हनीफ खान ने हकीम खां सूरी के ऐतिहासिक बलिदान को याद किया। उन्होंने बताया कि मेवाड़ की आन, बान और शान की रक्षा के लिए हकीम खां सूरी ने धर्म से ऊपर उठकर मातृभूमि को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपने 3000 से अधिक जांबाज पठान सैनिकों के साथ महाराणा प्रताप का कंधा से कंधा मिलाकर साथ दिया और मुगल सम्राट अकबर की विशाल सेना का डटकर मुकाबला करते हुए वीरगति प्राप्त की।

महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संस्थापक हाजी मोहम्मद बक्श ने ऐतिहासिक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 19 जून 1576 को हुए प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध में हकीम खां सूरी ने देश की रक्षा करते हुए शहादत प्राप्त की थी।

ऐतिहासिक मान्यता: इतिहास में यह मान्यता बेहद चाव से दोहराई जाती है कि युद्ध के दौरान हकीम खां सूरी का सिर हल्दीघाटी में गिरा था और उनका धड़ लड़ते-लड़ते रक्त तलाई तक आ गया था, जहां उन्हें दफन किया गया। सूरी का यह सर्वोच्च बलिदान मेवाड़ और पूरे राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण, आपसी भाईचारे एवं अद्वितीय वीरता का एक ऐसा उदाहरण है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

महासंघ और कादरी अंजुमन के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से पढ़ी फातिहा
संस्थापक अध्यक्ष हाजी मोहम्मद बक्श के नेतृत्व में मजार शरीफ पर सामूहिक रूप से दुआ मांगी गई और देश में अमन-चैन व भाईचारे की कामना की गई। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उदयपुर और आस-पास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

इस ऐतिहासिक मौके पर मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय सचिव इरफान मुल्तानी, प्रदेश संगठन सचिव मोइनुद्दीन, जिला उपाध्यक्ष अयूब शेख, और गोगुंदा ब्लॉक अध्यक्ष शेर खान मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही सज्जाद मोहम्मद, शाहिद भाई, शेरू खान, अमन खान, हजरत शेर खान, सईद भाई सहित मुस्लिम महासंघ एवं ‘कादरी अंजुमन खमनोर’ के तमाम कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर महान राष्ट्रभक्त हकीम खां सूरी को नमन किया।

 

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