उदयपुर में जश्न-ए-विलादत का रूहानी समां : सरकार की आमद मरहबा’ की सदाओं के साथ शान-ओ-शौकत से निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी

उदयपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम, रहमतुल-लिल-आलमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के यौम-ए-पैदाइश यानी 12 रबीउल-अव्वल के


 

फोटो : राजेंद्र हिलोरिया

उदयपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम, रहमतुल-लिल-आलमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के यौम-ए-पैदाइश यानी 12 रबीउल-अव्वल के मुबारक मौके पर बुधवार को शहर-ए-उदयपुर अकीदत व मोहब्बत के रंग में सराबोर नज़र आया। दो रोज़ तक चली महफ़िल-ए-मिलाद के नूरानी सिलसिले के बाद शहर में रिवायती शान-ओ-शौकत और पुरजोश जज्बे के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।

इस रूहानी मौके पर पूरे शहर के मुस्लिम बस्तियों और मुहावरों को दुल्हन की तरह सजाया गया था। गली-कूचों और चौराहों पर मक्का मुअज़्ज़मा, मदीना मुनव्वरा, करबला-ए-मुअल्ला और दरगाह हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ (रह.) के खूबसूरत व रूहपरवर शबीह (मॉडल) सजाए गए थे, जो अकीदतमंदों की निगाहों का मरकज़ बने रहे।

अंजुमन से हुआ जुलूस का आग़ाज़

शहर के तमाम मोहल्लों व वाडियों से अकीदतमंदों के छोटे-छोटे काफिले पुरखुलूस सदाएं बुलंद करते हुए अंजुमन चौक पहुंचे। यहां से दोपहर बाद मरकज़ी जुलूस-ए-मोहम्मदी का बाकायदा आगाज हुआ।

जुलूस में क्या नौजवान, क्या बुजुर्ग और क्या मासूम बच्चे—सभी पाकीज़ा इस्लामी लिबास (जुब्बा, कुर्ता-पाजामा और दस्तार-ए-फजीलत) जेबे-तन किए हुए हाथों में सब्ज परचम (हरे झंडे) थामे हुए थे। फिजाओं में गूंजती ‘सरकार की आमद मरहबा’, ‘आका की आमद मरहबा’, ‘नारा-ए-तकबीर – अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-रिसालत – या रसूलअल्लाह’ की गूंज से पूरा माहौल पुरनूर और रूहानी हो गया।

खिदमत-ए-खल्क और लंगर-ए-आम का हुस्न

जुलूस के पूरे रास्ते पर जगह-जगह खिदमत-ए-खल्क का बेमिसाल नजारा देखने को मिला। आशिकाने-रसूल के इस्तकबाल के लिए मुहावरों पर तोरणद्वार लगाए गए थे। सबीलों पर अकीदतमंदों के लिए ठंडा शरबत, मुख्तलिफ किस्म की लजीज बिरयानी, जाफरानी पुलाव, शीर-शीरीनी, फल और चाय-पानी के वसीअ लंगर का एहतमाम किया गया था। हर शख्स कार-ए-खैर में हिस्सा लेकर सवाब हासिल करने में जुटा दिखा।

मुकर्ररा रास्तों से होकर दरगाह पर हुआ इख्तिताम

जुलूस अंजुमन से रवाना होकर हरबेनजी का खुर्रा, हाथीपोल, सिलावटवाड़ी, अंबावगढ़ कच्ची बस्ती, आयुर्वेद चौराहा और मल्लातलाई से गुजरता हुआ ब्रह्मपोल बाहर वाके’ मशहूर रूहानी बुजुर्ग मौलाना मुफ्ती ज़हीरुल हसन साहब (रह.) की दरगाह-ए-आलिया पर पहुंचा।

दरगाह शरीफ पर पहुंचकर अकीदतमंदों ने खिराज-ए-अकीदत के फूल व चादर पेश की। इसके बाद महफ़िल-ए-नात और पुरखुलूस फातिहा ख्वानी का एहतमाम किया गया। उलमा-ए-किराम ने मुल्क व कौम की तरक्की, अमन-ओ-अमान, सलामती और आपसी भाईचारे के लिए खुसूसी दुआएं करवाईं। दुआ के बाद शीरीनी बांटी गई और अकीदतमंद पुरअमन तरीके से अपने-अपने घरों को रुखसत हुए।

– उलमा-ए-किराम और अंजुमन पदाधिकारियों की रही मौजूदगी


इस अवसर पर मुफ्ती मुतीउर्रहमान, मुफ्ती अहमद हुसैन, मौलाना जुलकरनैन बल्यावी, मौलाना आस मोहम्मद मुजाहिदी, मौलाना सोबदार आलम, हाफिज मेहमूदज्जमा सहित शहर एवं आसपास के कई उलमा-ए-किराम, सदर दरगाह इमरत रसूल बाबा हाजी सरवर खान, अंजुमन सदर मुख्तार अहमद कुरैशी, सेक्रेट्री मुस्तफा शेख, नायब सदर फारूक कुरैशी, जॉइंट सेक्रेट्री इजहार हुसैन, काबिना मेंबर सैयद इरशाद अली, एडवोकेट आदिल, फिरोज बशीर खान, तनवीर चिश्ती, एडवोकेट तौकिर रजा, अनीस अब्बासी, एडवोकेट शहजाद खान, फखरुद्दीन शेख, इरशाद खान, अनीस रजा सहित अंजुमन स्टाफ के ऑफिस इंचार्ज अजहर खान, अनीस खान, इरफान अशरफी, अब्दुल वहिद, आफताब आलम, कमर रजा, साजिद रजा, आरिफ सहित अंजुमन जनरल हाउस मेम्बरान, समाज के मोतबिरान एवं अकीदतमंद मौजूद रहे।

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