फोटो : कमल कुमावत

उदयपुर। दिव्यता और भक्ति के संगम की नगरी, जहां हर कोना सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। आज इस नगरी की रौनक और भी बढ़ गई, जब बापूबाजार में स्थापित उदयपुर चा राजा गणेशजी की प्रतिमा पर शुक्रवार को 41 लाख रुपए की भव्य आंगी की गई। यह आंगी सच में एक अद्भुत दृश्य थी, जिसने हर भक्त के दिल को छू लिया और उन्हें भक्ति की गहराइयों में डुबो दिया। दर्शन के लिए शनिवार को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।

जैसे ही सूरज की किरणें उदयपुर की गलियों में फैल रही थीं, उदयपुर चा राजा की भव्य आंगी की तैयारियों ने नगर को रंग-बिरंगी लाइटों और पुष्पों से सजा दिया। महलों की गलियों से लेकर गलियों तक, हर जगह गणेशजी की भक्ति की लहर बह रही थी। 41 लाख रुपए की इस आंगी में भगवान गणेश की मूर्ति को सोने, चांदी और बहुमूल्य रत्नों से सजाया गया था, जिसने भक्तों को उसकी दिव्यता का अनुभव कराया।

कर्णप्रिय भजनों और मंत्रों की गूंज ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। हर भक्त की आंखों में श्रद्धा की चमक और हृदय में अनन्त भक्ति की लहरें थीं। आंगी के मार्ग में हर जगह फूलों की बारिश हो रही थी और रूद्राक्ष की माला से सजी गणेशजी की मूर्ति को देखकर भक्तों की भक्ति और भी गहरी हो गई।

इस भव्य आयोजन में शामिल हुए नगरवासियों ने गणेशजी की पूजा के साथ-साथ नगर के समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की। गणेशजी की मूर्ति को देखकर भक्तों की भावनाएं उफान पर थीं, मानो भगवान गणेश खुद उनके बीच आकर उनके दुखों और परेशानियों को दूर कर रहे हों।

इस आयोजन ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि उदयपुर की भूमि में भक्ति और धार्मिकता का कितना गहरा संबंध है। गणेशजी की इस आंगी ने न केवल नगरवासियों को बल्कि हर भक्त को धार्मिकता और भक्ति की अमृतधारा में लीन कर दिया। इस अद्वितीय आयोजन ने उदयपुर को भक्ति और दिव्यता के एक नए आयाम में पहुंचा दिया, जहां हर दिल गणेशजी की भव्यता और महिमा से भर गया।






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