भारत-यूएई शिखर वार्ता : साढ़े तीन घंटे के संक्षिप्त दौरे में हुए कई ऐतिहासिक समझौते

नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान सोमवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संक्षिप्त दौरे पर भारत पहुँचे। केवल साढ़े तीन घंटे की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अध्याय लिखे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति अल नाह्यान का स्वागत किया, जो दोनों नेताओं के बीच की घनिष्ठता को दर्शाता है।

प्रमुख रणनीतिक समझौते : ऊर्जा सुरक्षा में बड़ा कदम: यूएई अब भारत को सालाना 5 लाख मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति करेगा। इस समझौते के बाद यूएई भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। साथ ही, नागरिक परमाणु सहयोग को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई।

रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग : दोनों देशों ने एक ‘स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप’ के लिए सहमति जताई है। इसके अलावा, स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, संयुक्त उपग्रह मिशन और स्पेस एकेडमी की स्थापना के लिए ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर किए गए।

गुजरात में मेगा प्रोजेक्ट : यूएई की भागीदारी से गुजरात के धोलेरा में एक विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) विकसित किया जाएगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, स्मार्ट टाउनशिप और ग्रीनफील्ड पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल होंगे।

आर्थिक लक्ष्य : दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को साल 2032 तक 200 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

वैश्विक कूटनीति पर मंथन : विदेश सचिव विक्रम मिसरी के अनुसार, नेताओं ने द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ मध्य पूर्व (Middle East) के तनावपूर्ण हालात पर भी चर्चा की। इसमें गज़ा शांति प्रक्रिया, ईरान की स्थिति और यमन संकट जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। यूएई ने अबू धाबी में भारतीय संस्कृति और कला को समर्पित एक ‘हाउस ऑफ इंडिया’ म्यूजियम बनाने पर भी सहमति दी है।

दौरे का महत्व : विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच यूएई के राष्ट्रपति का यह दौरा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। संक्षिप्त समय के बावजूद इतने बड़े स्तर के समझौतों ने दोनों देशों के ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) को और अधिक मजबूती दी है।

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