ट्रंप का दावा : मादुरो ‘पकड़े गए’, अमेरिका ने वेनेज़ुएला में किया सीधा सैन्य ऑपरेशन

लैटिन अमेरिका में सत्ता परिवर्तन की कोशिश या अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना?

काराकास/वॉशिंगटन | 

वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास में शनिवार तड़के हुए भीषण धमाकों के बाद अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के तहत वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को “पकड़ लिया है” और उन्हें अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस इवो जीमा के ज़रिये अमेरिका लाया जा रहा है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर मादुरो की एक तस्वीर साझा की, जिसमें वे आंखों पर मास्क लगाए और हेडफ़ोन पहने दिखाई दे रहे हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद फ़्लोरिडा स्थित अपने आवास मार-ए-लागो में प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर ट्रंप ने न सिर्फ़ ऑपरेशन की पुष्टि की, बल्कि यह भी कहा कि अमेरिका वेनेज़ुएला को “तब तक चलाएगा, जब तक सत्ता का सुरक्षित और समझदारी भरा हस्तांतरण नहीं हो जाता।”

यह बयान सीधे तौर पर किसी संप्रभु देश में सत्ता हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है।


अमेरिका का पक्ष: ‘नार्को-टेररिज़म’ के ख़िलाफ़ कार्रवाई

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी ने घोषणा की है कि न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ़्लोर्स के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जाएगा। मादुरो पर अमेरिका के ख़िलाफ़ नार्को-टेररिज़म की साज़िश, कोकीन तस्करी और हथियार रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

ट्रंप का दावा है कि वेनेज़ुएला ड्रग तस्करी का बड़ा केंद्र रहा है और अमेरिका ने समुद्री रास्तों से आने वाली “97 प्रतिशत ड्रग सप्लाई” को ख़त्म कर दिया है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़, यह ऑपरेशन सेना की विशेष इकाई डेल्टा फ़ोर्स द्वारा अंजाम दिया गया और इसमें कोई अमेरिकी सैनिक हताहत नहीं हुआ।


वेनेज़ुएला की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति के जीवित होने का सबूत मांगा

दूसरी ओर, वेनेज़ुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज़ ने अमेरिकी दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकार के पास राष्ट्रपति मादुरो और फ़र्स्ट लेडी के ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने दोनों के जीवित होने का “तुरंत सबूत” मांगा है।

रक्षा मंत्री व्लादिमीर पैड्रिनो लोपेज़ ने पूरे देश में सैन्य बल तैनात करने की घोषणा करते हुए इसे वेनेज़ुएला पर अब तक का “सबसे बड़ा हमला” बताया है। उनका कहना है कि अमेरिकी हमले रिहायशी इलाक़ों के पास हुए हैं और आम नागरिकों को भी नुक़सान पहुँचा है।

सरकार ने इसे अमेरिका द्वारा वेनेज़ुएला के तेल और खनिज संसाधनों पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश बताया है और राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: वैश्विक ध्रुवीकरण तेज़

इस घटनाक्रम पर रूस, चीन और कोलंबिया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

  • रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन बताते हुए “सशस्त्र आक्रमण” करार दिया है।

  • चीन ने संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा की है।

  • कोलंबिया ने किसी भी एकतरफ़ा सैन्य कार्रवाई को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरा बताया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गंभीर टकराव का कारण बन सकता है।


ज़मीनी हालात: डर और अनिश्चितता

काराकास में मौजूद बीबीसी की पत्रकार वेनेसा सिल्वा के मुताबिक़, धमाके इतने तेज़ थे कि पूरा शहर कांप उठा। कई सैन्य ठिकानों के पास विस्फोटों के वीडियो सामने आए हैं। हालांकि फिलहाल शहर में शांति है, लेकिन लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।


विश्लेषण: आगे क्या?

यह घटनाक्रम सिर्फ़ अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच टकराव नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की ‘रेजीम चेंज’ नीति, लैटिन अमेरिका में प्रभाव, और वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ते टकराव का संकेत भी देता है।

मुख्य सवाल अब भी बने हुए हैं:

  • क्या मादुरो वास्तव में अमेरिकी हिरासत में हैं?

  • अमेरिका को किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को पकड़ने का अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी अधिकार है या नहीं?

  • क्या यह कार्रवाई क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल देगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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