
युद्ध की कगार पर मध्य पूर्व — ट्रंप का अल्टीमेटम और ईरान की नई शर्त

तेहरान/वॉशिंगटन/काठमांडू | मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान द्वारा दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन, होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में ‘अंतिम चेतावनी’ जारी की है, जबकि ईरान ने इस रास्ते को खोलने के बदले ‘युद्ध क्षतिपूर्ति’ की मांग रख दी है।
1. होर्मुज़ स्ट्रेट: ‘टोल टैक्स’ या ‘युद्ध का हर्जाना’?
ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मेहदी तबातबाई ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को अब ‘ट्रांजिट टोल’ देना होगा। ईरान का तर्क है कि इस वसूली का एक बड़ा हिस्सा युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मांग को ‘हताशा और गुस्से’ से भरा बताया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि 6 अप्रैल (आज) तक ईरान ने यह समुद्री रास्ता सुचारु रूप से नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के तेल ठिकानों पर कब्जा करने और “सब कुछ तबाह करने” के लिए मजबूर होगा।
2. ‘नो वन इज़ लेफ्ट बिहाइंड’: अमेरिकी एयरमैन का नाटकीय रेस्क्यू
ईरान के पहाड़ी इलाकों में क्रैश हुए एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के क्रू सदस्य को बचाने के ऑपरेशन ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
अमेरिकी पक्ष: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी विशेष बलों ने कर्नल रैंक के एक घायल अधिकारी को ईरानी सेना के चंगुल से सुरक्षित निकाल लिया है। इसे “इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू” बताया जा रहा है।
ईरानी पक्ष: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस दावे को ‘सफेद झूठ’ करार दिया है। उनका कहना है कि अमेरिकी कोशिश नाकाम रही और उन्होंने इस घटना की तुलना 1980 के विफल ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ से की है।
इस बीच, इसराइली पीएम नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन के लिए ट्रंप को बधाई देते हुए इसे “स्वतंत्र समाजों के संकल्प की जीत” बताया है।
3. नेपाल में ईंधन संकट: हफ्ते में दो दिन की छुट्टी का एलान
खाड़ी के इस युद्ध का असर अब दक्षिण एशिया तक पहुँच गया है। ईरान-अमेरिका तनाव के कारण तेल की कीमतों में आए उछाल और आपूर्ति ठप होने से नेपाल में भारी ईंधन संकट पैदा हो गया है।
सरकारी फैसला: प्रधानमंत्री बालेन शाह की कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि ईंधन बचाने के लिए अब नेपाल में सरकारी दफ्तर और स्कूल हफ्ते में दो दिन (शनिवार और रविवार) बंद रहेंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर: सरकार ने डीजल-पेट्रोल वाहनों को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदलने के लिए नए कानूनी प्रावधानों को भी मंजूरी दी है।
4. कुवैत और लेबनान में भारी बमबारी
युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों को भी अपनी चपेट में ले रही है:
कुवैत: ईरान के ड्रोन हमलों ने ‘कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन’ के मुख्यालय और तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे वहां भारी आगजनी और नुकसान की खबर है।
लेबनान: इसराइली सेना ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। जवाब में हिज़बुल्लाह ने एक इसराइली युद्धपोत पर मिसाइल दागने का दावा किया है।
5. ईरान में ‘डिजिटल अंधेरा’
ईरान के भीतर पिछले 37 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह बंद है। नेटब्लॉक्स (NetBlocks) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया का अब तक का सबसे लंबा और व्यापक शटडाउन है। आम जनता बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट चुकी है, जबकि स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट डिवाइस रखने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान कर दिया गया है।
दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। क्या कूटनीति के जरिए होर्मुज़ स्ट्रेट खुलेगा, या फिर 6 अप्रैल की यह समयसीमा एक बड़े वैश्विक महायुद्ध की शुरुआत बनेगी? तेल की बढ़ती कीमतें और नेपाल जैसे देशों में पैदा हुए हालात बताते हैं कि यह युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है।
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