
उदयपुर। गुलाब बाग़ स्थित दरगाह हज़रते शाह सैयद अब्दुल शकूर साबिर अली चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें अवाम मुहब्बत से इमली वाले बाबा के नाम से याद करती है, उनका सालाना 292वाँ उर्स मुबारक निहायत अक़ीदत व एहतेराम के साथ जारी है। दरगाह इंतज़ामिया कमेटी के प्रवक्ता मोहम्मद रफ़ीक शाह “बहादुर” ने बताया कि उर्स के तयशुदा प्रोग्रामात के तहत आज की तमाम रस्में पुरअमन माहौल में अदा की गईं।
आज बुधवार, 19 नवंबर को फ़ारूके-आज़म नगर और अंजुमन चौक से अकीदतमंदों का रौशन चादर शरीफ़ का जुलूस रवाना हुआ, जो गुलाब बाग़ की शेर वाली फाटक से गुज़रता हुआ दरगाह शरीफ़ पहुँचा। जुलूस में मयूर बैंड ने नात-ए-पाक का मुबारक नजराना पेश किया, जबकि हकीम भाई ग़ोड़ी वालों की ग़ोड़ियाँ रक्स की दिलकश अदाओं के साथ जुलूस की रौनक बढ़ा रही थीं। मलंगों और दरवेशों की टीमें सूफ़ियाना मस्ती में झूमती हुई आगे बढ़ रही थीं।
चादर शरीफ़ की पेशी के इस बाबरक़त मौके पर हज्जन नसीम हुसैन नूरी, दरगाह के मुत्तवल्ली इमरान हुसैन नूरी, तोशिफ हुसैन, आक़िब हुसैन, मोहम्मद शफ़ी, मुनीर, निसार ख़ान समेत सेकड़ों जायरीन मौजूद रहे। तमाम हाज़रीन ने आस्ताने पर चादर पेश करते हुए महबूब-ए-वतन हिंदुस्तान की सलामती और अम्न-ओ-अफ़िय़त की दुआएँ माँगीं।
बाद नमाज़-ए-ईशा महफ़िले-मिलाद का एहतमाम किया गया, जिसमें नातख़्वाँ हज़रात—बुलबुले बाग़-ए-मदीना समीर कादरी, कामिल बरकाती और मोहम्मद हफ़ीज़ कादरी—ने हम्द, नात और मनक़बत का ख़ूबसूरत नज़राना पेश किया। इसके बाद महफ़िले-शमा हुई जिसमें हिंदुस्तान की माया-ए-नाज़ कव्वाल पार्टी, नज़ीर आसिफ नियाज़ी और उनकी टीम ने सूफ़ियाना कलाम से महफ़िल को रौशन कर दिया। फिर नज़ीर अली कादरी और उनके हमराह, जो दिल्ली से पहली बार आस्ताने आलिया पर तशरीफ़ लाए हैं, उन्होंने अपने ख़ास अंदाज़ में सूफ़ियाना नग़्मात पेश किए।
देर रात्रि बाबा साहब के मजार-ए-पाक पर ग़ुस्ल और संदल की पुरनूर रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी तादाद में जायरीन शामिल हुए।
उर्स मुबारक के प्रोग्राम के मुताबिक आज गुरुवार, 20 नवंबर को बाद नमाज़-ए-जौहर रंग की महफ़िल सजीगी, जबकि नमाज़-ए-अस्र के बाद कुल की फ़ातिहा अदा की जाएगी।
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