फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। “काजळ टिकी लादयो ऐ मां… घूमर रमवा म्हें जास्यां”—इसी पारंपरिक मधुर स्वर में आज उदयपुर का गांधी ग्राउंड रंगों, सुरों और परंपराओं की अनोखी छटा से सराबोर हो उठा। उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी की पहल पर जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को संभाग स्तरीय घूमर महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें जब सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति ने एक साथ घूमर की लय पर पग धरें, तो मानो मेवाड़ की सांस्कृतिक आत्मा सजीव होकर सामने उतर आई। रंगबिरंगी लहरियाँ, घूमती ओढ़णियाँ और घुँघरुओं की छन-छन में वह पुरातन सौंदर्य झलक रहा था, जिसकी गूंज पीढ़ियों से इस भूमि को संस्कारित करती आई है।


कहा भी गया है—“थारो रंग घणे सुहावो, घूमर री चाल निराली,
आज मेवाड़ री रूह ने, लोक-धुन में बात बताई।”
किशोरियों से लेकर प्रौढ़ महिलाओं तक ने जिस उत्साह और सौम्यता से भाग लिया, उसने आयोजन की छाप और गहरी कर दी। पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुनीता सरोच के अनुसार इस वर्ष 475 से अधिक युवतियों एवं महिलाओं ने प्रतिभागी के रूप में हिस्सा लेकर इस महोत्सव को ऐतिहासिक ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने कहा कि घूमर न केवल नृत्य है बल्कि यह राजस्थान की आत्मा, उसकी शालीनता और उसकी आन-बान-शान का ऐसा प्रतीक है, जो हर बार अपने उल्लास से लोगों का मन मोह लेता है।

महोत्सव का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ, जिसमें राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, लोकसभा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, जिला प्रमुख ममता कुंवर पंवार, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, उप जिला प्रमुख पुष्कर तेली, संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, नगर निगम की पूर्व महापौर रजनी डांगी, समाजसेवी गजपाल सिंह, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पिंकी मंडावत और खुशबू मालवीय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने एकमत होकर कहा कि ऐसे आयोजनों से प्रदेश की परंपराओं को नई ऊर्जा मिलती है और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों को गहराई से समझ पाती है।

महोत्सव के दौरान कई प्रतिभागियों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी का मन जीता, परंतु बड़गाँव की दिव्यांग बालिका दिया श्रीमाली ने जिस आत्मविश्वास और लयबद्धता के साथ घूमर प्रस्तुत किया, उसने पूरे पंडाल का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनके प्रदर्शन पर दर्शकों ने देर तक तालियाँ बजाकर उत्साहवर्धन किया। दिया ने बताया कि उसे बचपन से ही घूमर के प्रति विशेष लगाव है और इस मंच ने उसके मन के सपने को साकार करने का अवसर दिया। उपस्थित जनसमूह उसकी कला ही नहीं, उसके जज़्बे को भी सलाम कर रहा था।
प्रतिभागियों में से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विभिन्न टोली को आयोजन समिति द्वारा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। मेवाड़ के रंग ग्रुप ने बेस्ट ग्रुप डांस में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि अलबेली घूमर ग्रुप उपविजेता रहा। बेस्ट कॉस्ट्यूम में भी मेवाड़ के रंग ग्रुप ने बाज़ी मारी और अलबेली घूमर ग्रुप दूसरे स्थान पर रहा। बेस्ट सिंक्रनाइजेशन में मीरा प्रकाश वर्मा फाउंडेशन विजेता घोषित हुआ और मेवाड़ के रंग ग्रुप उपविजेता रहा। इसी प्रकार बेस्ट ज्वेलरी श्रेणी में मीरा प्रकाश वर्मा फाउंडेशन ने प्रथम स्थान और घूमर नायिका मीरा गर्ल्स कॉलेज ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। बेस्ट कोरियोग्राफी में मेवाड़ के रंग विजेता बने और रंगीला रिदम उपविजेता रहा। सभी विजेता एवं उपविजेता दलों को क्रमशः 11 हजार और 7 हजार रुपये के नकद पुरस्कार प्रदान किए गए।

पूरा गाँधी ग्राउंड पूरे समय रंग, संगीत और उत्साह से गूँजता रहा और ऐसा प्रतीत होता रहा कि घूमर की हर लय, हर घूम, हर उठती ओढ़णी कह रही हो—
“माटी रो रंग अमर छे, रीति-रिवाज़ बणि सांस,
घूमर घूमे तो लागे, जैसे थारो रूप गलास।”

राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का यह महोत्सव न केवल एक आयोजन साबित हुआ बल्कि यह याद दिलाने वाला दिन भी रहा कि परंपराएँ तब तक जीवित रहती हैं, जब तक उन्हें निभाने वाले दिलों में उनका संगीत धड़कता रहता है।
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