
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “अभियुक्त होने पर घर ध्वस्त नहीं किया जा सकता”
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बुलडोज़र एक्शन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ़ सख़्त टिप्पणी की है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथ की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति का घर सिर्फ इसलिए ध्वस्त नहीं किया जा सकता क्योंकि वह किसी अपराध में अभियुक्त है।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “कोई व्यक्ति दोषी भी हो, तो भी उसके घर को बिना कानूनी प्रक्रिया के पालन के ध्वस्त नहीं किया जा सकता।” अदालत ने कहा कि वह इस मामले में पूरे देश के लिए दिशानिर्देश तय करेगी, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होगा कि किसी भी अनाधिकृत निर्माण को संरक्षण दिया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने एफिडेविट के माध्यम से यह साबित किया है कि ध्वस्तीकरण से पहले नोटिस दिया गया था और इसका संबंध अपराध के मामले से नहीं था। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे और सीयू सिंह ने कहा कि घर इस कारण से ध्वस्त किए गए क्योंकि वे अभियुक्त थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को निर्धारित की है।
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