
उदयपुर। प्रकृति रिसर्च सोसाइटी, उदयपुर (PRSU) द्वारा रविवार को पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय विचार-मंथन बैठक का आयोजन किया गया। सोसाइटी के मुख्यालय पर आयोजित इस बैठक में देशभर के 35 से अधिक राज्य समन्वयकों और प्रतिष्ठित भूगोलविदों ने हिस्सा लिया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थापक अध्यक्ष प्रो. पी.आर. व्यास ने कहा कि अनुसंधान का लाभ तभी है जब वह जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय सुधार ला सके। मुख्य वक्ता प्रो. सुधेश नांगिया ने सहयोगात्मक शोध मॉडल की वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपशिष्ट प्रबंधन, जल प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय निकायों और समुदायों को साथ आना होगा। विशेष रूप से ‘अर्बन विलेजेज़’ और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों के संरक्षण पर गहन चर्चा की गई।
बैठक के 5 प्रमुख लक्ष्य : सोसाइटी ने भविष्य के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है, जिसके मुख्य बिंदु हैं-स्थानीय चुनौतियों पर नए शोध पथों की खोज। सरकारी निकायों के साथ मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के व्यावहारिक समाधान। क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना का निर्माण। जनसंवाद और सेमिनार के जरिए पर्यावरण साक्षरता बढ़ाना। आगामी शोध परियोजनाओं के लिए रूपरेखा तैयार करना।
देशभर से जुटे विषय विशेषज्ञ : बैठक में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के विद्वानों ने भागीदारी की। इसमें बीएचयू के प्रो. ए.पी. मिश्रा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. ए.आर. सिद्दीकी, जम्मू से प्रो. अनुराधा शर्मा, कोलकाता से प्रो. एस. सेनगुप्ता और मुंबई विश्वविद्यालय के प्रो. एस.वी. चव्हाण सहित कई अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस दौरान युवा भूगोलविदों से नए शोध प्रस्ताव भी आमंत्रित किए गए।
अक्टूबर में उज्जैन में होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन : बैठक के दौरान भविष्य की योजनाओं की घोषणा करते हुए प्रो. मोहन निमोले ने बताया कि ‘द्वितीय अंतरराष्ट्रीय प्रकृति सम्मेलन’ का आयोजन 23-24 अक्टूबर 2026 को विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.) में किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन सचिव श्री एच.एल. व्यास द्वारा बजट प्रस्तुति और प्रो. राकेश दशोरा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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