वित्त वर्ष 2028 तक 70 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा का महत्वाकांक्षी लक्ष्य; सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के साथ 530 MW का पावर एग्रीमेंट, 2050 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन की दिशा में बड़ा कॉर्पोरेट कदम
उदयपुर।पर्यावरण संरक्षण और सतत औद्योगिक विकास (Sustainable Development) के संतुलन को नया आयाम देते हुए वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (HZL) ने अपनी कुल बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाकर 22 प्रतिशत कर ली है। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक और शीर्ष दस सिल्वर उत्पादक कंपनियों में शुमार हिंदुस्तान जिंक के कुल ऊर्जा मिश्रण में स्वच्छ ऊर्जा का यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के लगभग 18 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।
कंपनी अब वित्त वर्ष 2028 तक अपनी कुल बिजली आवश्यकता का 70 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने के रोडमैप पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
जनहित और पर्यावरण सुरक्षा: ग्रीन एनर्जी उत्पादन में 41% की भारी वृद्धि
औद्योगिक प्रदूषण घटाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के संकल्प के तहत कंपनी ने राजस्थान और उत्तराखंड स्थित अपनी सभी औद्योगिक इकाइयों में अभूतपूर्व बदलाव किए हैं:
892 मिलियन यूनिट ग्रीन एनर्जी उत्पादन: कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 892 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन किया, जो वित्त वर्ष 2025 (632 मिलियन यूनिट) की तुलना में करीब 41% की ठोस बढ़ोतरी है।
530 मेगावाट राउंड-द-क्लॉक (RTC) एग्रीमेंट: 70% स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के लिए सेरेंटिका रिन्यूएबल्स के साथ आपूर्ति समझौते को 450 मेगावाट से बढ़ाकर 530 मेगावाट कर दिया गया है, जिससे सौर, पवन व बैटरी स्टोरेज के जरिए 24 घंटे निर्बाध ग्रीन बिजली मिलेगी।
फ्लोटिंग सोलर व वेस्ट हीट रिकवरी: कंपनी जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स और वेस्ट हीट रिकवरी बॉयलर की क्षमता बढ़ाकर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को न्यूनतम कर रही है।
“जिम्मेदार खनन ही भविष्य का आधार”: मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश
कंपनी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने कहा:
“धातु एवं खनन उद्योग का भविष्य पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को न्यूनतम करते हुए अधिकतम उत्पादन करने में निहित है। हमारी कुल बिजली खपत में 22 प्रतिशत हिस्सेदारी स्वच्छ ऊर्जा की हो चुकी है, जिसे 2028 तक 70 प्रतिशत पहुंचाना है। स्वच्छ ऊर्जा हमारे लिए सिर्फ कार्बन उत्सर्जन घटाने का जरिया नहीं, बल्कि एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और सामाजिक रूप से उत्तरदायी व्यवसाय का आधार है। हम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विकसित भारत 2047 के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।”
ग्रीन मोबिलिटी और भविष्य की हाइड्रोजन तकनीक
पर्यावरण अनुकूल कार्यशैली (Eco-friendly Operations) को बढ़ावा देने के लिए कंपनी ने तकनीकी नवाचारों में भी नए मानक स्थापित किए हैं:
देश की पहली 250 टन इलेक्ट्रिक क्रेन: राजस्थान के देबारी जिंक स्मेल्टर में भारत की पहली 250 टन क्षमता वाली विशाल इलेक्ट्रिक क्रेन तैनात की गई है, जिससे जीवाश्म ईंधन (डीजल) की निर्भरता घटी है।
ग्रीन हाइड्रोजन पर करार: एडवेंटेक एसोसिएट्स एलएलपी एवं एयरो ईगल ऑटोमोबाइल्स के साथ एमओयू कर भूमिगत खदानों, भारी मशीनरी और वाहनों में ग्रीन हाइड्रोजन व स्वच्छ ऊर्जा समाधानों के उपयोग पर शोध शुरू किया गया है।
वैश्विक मान्यता: कंपनी साइंस बेस्ड टार्गेट्स इनिशिएटिव (SBTi) द्वारा मान्य ‘नेट जीरो 2050’ लक्ष्य की ओर अग्रसर है। हिंदुस्तान जिंक को एस एंड पी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट में विश्व की सबसे सस्टेनेबल मेटल एवं माइनिंग कंपनी का दर्जा प्राप्त है।
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