
‘उरी’ से लेकर गदर और ‘चक दे! इंडिया तक, वो संवाद जिन्होंने दर्शकों के दिलों में भर दिया राष्ट्रप्रेम का अटूट जज्बा
मुंबई। भारतीय सिनेमा ने आजादी और देशभक्ति की भावना को हमेशा बड़े पर्दे पर बेहद शिद्दत के साथ उकेरा है। बॉलीवुड की कई कालजयी फिल्मों के संवाद ऐसे रहे हैं, जो थिएटर से बाहर निकलने के वर्षों बाद भी हर भारतीय की जुबान पर ताजा रहते हैं और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रभक्ति के जज्बे को दोगुना कर देते हैं।
1. उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक (2019)
दमदार डायलॉग: “ये हिंदुस्तान अब चुप नहीं बैठेगा… ये नया हिंदुस्तान है, ये घर में घुसेगा भी और मारेगा भी!”
किरदार व संदर्भ: फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) गोविंद भारद्वाज (अजीत डोभाल से प्रेरित किरदार) की भूमिका में परेश रावल ने यह डायलॉग बोला था। उरी आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई और ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक की रणनीति तय करते वक्त यह संवाद नए भारत के कड़े रुख और आत्मरक्षा के संकल्प को दर्शाता है।
2. राजी (2018)
दमदार डायलॉग: “वतन के आगे कुछ नहीं, खुद भी नहीं।”
किरदार व संदर्भ: मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में आलिया भट्ट (किरदार: सहमत) ने एक कश्मीरी जासूस की भूमिका निभाई, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध से पहले पाकिस्तान के एक सैन्य परिवार में ब्याही जाती है। निजी रिश्तों और देश के प्रति कर्तव्य के बीच यह संवाद निःस्वार्थ राष्ट्रसेवा की सर्वोच्च मिसाल पेश करता है।
3. चक दे! इंडिया (2007)
दमदार डायलॉग: “मुझे स्टेट्स के नाम न सुनाई देते हैं, न दिखाई देते हैं… सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है—’इंडिया’!”
किरदार व संदर्भ: भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच कबीर खान के रूप में शाहरुख खान खिलाड़ियों में एकता और राष्ट्रीय भावना जगाने के लिए यह संवाद बोलते हैं। अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों में बंटी टीम को यह डायलॉग ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के एक सूत्र में पिरो देता है।
4. गदर: एक प्रेम कथा (2001)
दमदार डायलॉग: “हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है, और जिंदाबाद रहेगा!”
किरदार व संदर्भ: तारा सिंह के अमर किरदार में सनी देओल ने जब लाहौर की सरजमीं पर नफरत फैलाने वालों के सामने यह हुंकार भरी, तो सिनेमाघरों में तालियों की गूंज थमने का नाम नहीं ले रही थी। यह संवाद हर भारतीय के स्वाभिमान और राष्ट्रीय गौरव की बुलंद आवाज बन चुका है।
5. सैम बहादुर (2023)
दमदार डायलॉग: “अमृतसर की पैदाइश हूं, बीवी बॉम्बे की है, दिल्ली में काम करता हूं… इससे ज्यादा इंडियन क्या हो सकता हूं?”
किरदार व संदर्भ: भारत के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के जीवन पर आधारित इस फिल्म में विक्की कौशल ने अपने बेबाक और निडर अंदाज से यह संवाद बोला। यह डायलॉग भारत की विविधता, एकता और एक सच्चे फौजी के भारतीय होने के गर्व को बेहद सादगी और मजबूती से बयां करता है।
About Author
You may also like
सस्टेनेबिलिटी का वैश्विक मानक : हिन्दुस्तान जिंक का यशद भवन कॉर्पोरेट एक्सीलेंस और LEED प्लेटिनम रेटिंग से पुनः अलंकृत
राजस्थान राज्य विश्वविद्यालय अशैक्षणिक अधिकारी-कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार
NATIONAL BULLETIN : Major News Headlines from India and Around the World
विधायक ताराचंद जैन की तत्परता से टला उदयपुर का जल संकट: 72 घंटे के तुगलकी फरमान पर रोक, 48 घंटे में ही होगी जलापूर्ति
भ्रष्टाचार की इस अनवरत दास्तान का अंत कहां? उदयपुर के बाद अब राजसमंद में 25 लाख की रिश्वत का नंगा नाच
