
उदयपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर देश भर में प्रकृति संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और सतत विकास (Sustainable Development) को लेकर व्यापक जागरूकता अभियानों की शुरुआत हुई है। वर्तमान में गहराते वैश्विक जलवायु संकट और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन जैसी गंभीर चुनौतियों को देखते हुए विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि अब समय केवल चर्चा करने का नहीं, बल्कि धरातल पर कड़े और जिम्मेदार कदम उठाने का है। इस दिशा में भारत की एकमात्र और विश्व की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक द्वारा स्थापित किए गए पर्यावरण समर्थक (Eco-friendly) प्रतिमान देश के कॉर्पोरेट जगत के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं। कंपनी द्वारा सतत खनन, जल संरक्षण और ग्रीन सप्लाई चेन के क्षेत्र में किए गए कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़ी पहचान मिली है, जो यह साबित करता है कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर भी औद्योगिक नेतृत्व हासिल किया जा सकता है।
जिम्मेदारी से भरा औद्योगिक सफर: सतत खनन और जैव विविधता में माइंस ने मारी बाजी
टिकाऊ और जिम्मेदार खनन (Sustainable Mining) की दिशा में हिंदुस्तान जिंक ने तकनीक के आधुनिकीकरण के जरिए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अंतर्राष्ट्रीय खान ब्यूरो (IBM) द्वारा आयोजित एमईएमसी (MEMC) वीक 2026 के दौरान कंपनी की प्रमुख खदानों—रामपुरा आगूचा, सिंदेसर खुर्द और मोचिया माइंस ने अपनी उत्कृष्ट और पर्यावरण-अनुकूल खनन प्रणालियों के लिए देश भर में शीर्ष तीन समग्र स्थानों पर क्लीन स्वीप करते हुए बाजी मारी है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि खदानों के तकनीकी विकास से भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण पूरी तरह मुमकिन है। इसके साथ ही, खदानों के आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक संतुलन और जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) के लिए फेडरेशन ऑफ Indian Mineral Industries (FIMI) द्वारा कंपनी की जावर माइंस को ‘सस्टेनेबल माइनिंग’ पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।

जल ही जीवन है : ‘वाटर स्टीवार्डशिप’ और पारदर्शी ईएसजी (ESG) नीतियों पर विशेष ध्यान
वर्तमान समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती यानी जल संकट से निपटने के लिए हिंदुस्तान जिंक ने ‘वाटर स्टीवार्डशिप’ (जिम्मेदार जल प्रबंधन) को अपनी कार्यप्रणाली का मुख्य स्तंभ बनाया है। भारतीय वाणिज्य मंडल (ICC) के सस्टेनेबिलिटी विज़न समिट 2026 में कंपनी को उसके जिम्मेदार जल प्रबंधन और जल संरक्षण के बेहतरीन प्रयासों के लिए ‘वाटर स्टीवार्डशिप’ श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर उपविजेता (रनर-अप) घोषित किया गया है। पानी की एक-एक बूंद को सहेजने और उसका पुनर्चक्रण (Recycle) करने की कंपनी की यह नीति उद्योगों के लिए जल-सकारात्मक (Water-Positive) बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही, कॉरपोरेट जगत में पर्यावरण समर्थक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए संस्थान को आईसीएआई (ICAI) सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स के तहत ‘बेस्ट बीआरएसआर रिपोर्ट – मैन्युफैक्चरिंग (लार्ज कैप)’ के खिताब से भी नवाजा गया है।
हरित आपूर्ति श्रृंखला की ओर बढ़ते कदम: ‘लॉजीशक्ति’ में मिला सर्वश्रेष्ठ ग्रीन लॉजिस्टिक्स का सम्मान
पर्यावरण संरक्षण दिवस के इस मौके पर उद्योगों द्वारा अपने कार्बन फुटप्रिंट को घटाने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को हरित बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लॉजीशक्ति शिखर सम्मेलन 2026 में हिंदुस्तान जिंक को उसके पर्यावरण के अनुकूल परिवहन और टिकाऊ रसद प्रयासों के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ सतत और हरित रसद’ (Best Sustainable & Green Logistics) का प्रतिष्ठित जूरी अवार्ड प्रदान किया गया है। परिवहन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करने की यह पहल हरित भविष्य के निर्माण में गेम-चेंजर साबित हो रही है। इसके अलावा, कंपनी की सीआईआई-आईटीसी सस्टेनेबिलिटी अवार्ड्स (CII-ITC Sustainability Awards) के तहत चंदेरिया, दरीबा और जावर इकाइयों को मिलने वाले ‘पर्यावरण उत्कृष्टता पुरस्कार’ भी इसकी सस्टेनेबल नीतियों की गवाही देते हैं।
वैश्विक पटल पर भारत का गौरव : एसएंडपी (S&P) ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी में मिला विश्व में पहला स्थान
वैश्विक पटल पर भारत की इन पर्यावरण समर्थक नीतियों और मजबूत ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) सिद्धांतों की गूंज साफ सुनाई दे रही है। यही कारण है कि ‘एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी एसेसमेंट’ की वैश्विक रैंकिंग में हिंदुस्तान जिंक को मेटल और माइनिंग (धातु और खनन) क्षेत्र में पूरे विश्व में प्रथम स्थान (Top Global Ranking) प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर पर्यावरण समर्थक शीर्ष एक प्रतिशत (Top 1%) कंपनियों की प्रतिष्ठित ‘एसएंडपी ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक’ में भी भारत के इस औद्योगिक दिग्गज ने अपनी जगह सुरक्षित की है। पर्यावरण दिवस के इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक का यह सफर यह संदेश देता है कि औद्योगिक प्रगति और पृथ्वी का संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व के पूरक हैं।
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