सुशासन की सीधी दस्तक : 181 हेल्पलाइन सेंटर पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, फोन पर सुनीं समस्याएं, मिनटों में जारी हुआ 10 साल से अटका मूल निवास

जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को शासन सचिवालय स्थित ‘राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन 181’ के कॉल सेंटर पहुँचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल कार्यप्रणाली का अवलोकन किया, बल्कि खुद हेडफोन लगाकर परिवादियों से सीधे संवाद किया। मुख्यमंत्री की आवाज फोन पर सुनकर आम नागरिक न केवल अचंभित रह गए, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं का तत्काल समाधान भी मिला।

केस 1 : 10 साल पुराना पेंच सुलझा, तुरंत जारी हुआ प्रमाण-पत्र

निरीक्षण के दौरान चूरू निवासी रूघाराम ने मुख्यमंत्री को बताया कि 10 वर्ष पुरानी मतदाता सूची उपलब्ध नहीं होने के कारण उनका मूल निवास प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो पा रहा था। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत निर्देश दिए। नतीजा यह रहा कि ई-मित्र के माध्यम से आवेदन को पुनः प्रोसेस किया गया और तहसील कार्यालय द्वारा तत्काल मूल निवास प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया।

केस 2 : गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर त्वरित एक्शन

इसी तरह जयपुर की ज्योति ने एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी न होने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए, जिसके कुछ ही समय बाद सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई। परिवादी ने मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर संतोष और आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश : “समाधान संक्षिप्त और परिणाम केंद्रित हो”

हेल्पलाइन के विभिन्न सेक्शनों का निरीक्षण करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:

जवाबदेही : शिकायतों पर विभागों द्वारा दिया जाने वाला जवाब ‘खानापूर्ति’ न होकर संक्षिप्त और पूर्णतः समाधान केंद्रित होना चाहिए।

परफॉर्मेंस रिपोर्ट : हेल्पलाइन सेंटर पर तैनात कार्मिकों की कार्यक्षमता (Performance Report) नियमित रूप से तैयार की जाए।

नागरिक संतुष्टि : नागरिक संतुष्टि दर (Satisfaction Rate) ही विभाग की सफलता का प्रमुख मापदंड होना चाहिए।

“कोई भी नागरिक असंतुष्ट न रहे”

मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जन समस्याओं का संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेहिता के साथ निस्तारण करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि परिवादियों की संतुष्टि दर में निरंतर वृद्धि हो सके।

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