चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट पर बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी का अहंकार क्या टूटने जा रहा है? राजनीतिक दमखम से बीजेपी का कितना भी माहौल दिखाई दे, लेकिन लोकल पॉलिटिक्स में सीपी जोशी का जबरदस्त विरोध है। इस विरोध को कम करने के लिए जोशी ने उन सब नेताओं की पार्टी में एंट्री करवा दी, जिनके वे हमेशा से विरोध में रहे। जयपुर से लेकर चित्तौड़गढ़ तक पार्टी में जोशी का विरोध देखने को मिला है। खास बात यह है कि इस बार सीपी जोशी के सामने मुकाबले में कांग्रेस और इस क्षेत्र के कद्दावर उदयलाल आंजना सामने हैं।
यही वजह है कि सीपी जोशी नामांकन भरने के बाद से अपने क्षेत्र से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीपी जोशी का वर्चस्व अभी इतना नहीं है कि किसी सीट पर वे असर डाल सके। उनके क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट पर विधानसभा चुनावों में बीजेपी प्रत्याशी की पॉजिशन तीसरे नंबर पर रही है। यही वजह है के बीजेपी से बागी होकर विधायक चंद्रभान आक्या को जोशी पार्टी में ले आए। पिछले डेढ़ दशक से पार्टी से अलग होकर जनता सेना बनाकर एक बार विधायक बने रणधीर सिंह भींडर को भी जोशी पार्टी में ले आए। बहरहाल यह निर्णय कर जोशी ने खुद का विरोध कम करने की कोशिश की, लेकिन जमीन पर इसका असर भी ज्यादा दिखाई नहीं दे रहा है।
अब अपने पक्ष में माहौल बनवाने के लिए जोशी ने वोटों के ध्रुवीकरण के लिए योगी का रोड शो करवाया। बीजेपी से नाराज राजपूतों को अपने पक्ष में करवाने के लिए डिप्टी सीएम दीया कुमारी का रोड शो करवाया। भीलवाड़ा में अमित शाह का रोड शो हुआ। इसके बावजूद चित्तौड़गढ़ में हवा रुख को बीजेपी के नेता खुद नहीं भांप पा रहे हैं। चित्तौड़गढ़ लोकसभा सीट के हर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के विधायकों और नेताओं के अपने समीकरण है। इसके बावजूद कुछ विशलेषक कांग्रेस की कमजोर रणनीति और उदासीनता के कारण जोशी की स्थिति मजबूत मान रहे हैं। पिछली बार मोदी लहर में जोशी करीब पांच लाख वोटों से जीते थे, लेकिन इस बार स्थिति वैसी नहीं है। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी उदयलाल आंजना का भी क्षेत्र में प्रमुख नेताओं में शुमार है। बहरहाल चित्तौड़गढ़ में इस बार पिछले चुनावों की तरह मुकाबला एक तरफा नहीं है। क्रिकेट में आखिरी बॉल तक के मुकाबले वाले मैच की तरह ही यहां सियासत का रोमांचक मुकाबला माना जा रहा है।
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