जयपुर। राजनीति में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बनने और बनाने का ट्रेंड चल रहा है, लेकिन मोदी और योगी बनना इतना आसान नहीं है। कुछ कट्टरवादी विचारधारा के लोग राजनीति में हर बाबा को योगी के रूप में देख रहे हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं। मोदी और योगी बनने के लिए कई साल लगाने पड़ेंगे। इस बात पर चर्चा इसलिए जरूरी है कि राजस्थान में तिजारा से बाबा बालकनाथ और पोकरण से बाबा प्रतापुरी के समर्थक योगी की तरही ही उन्हें सीएम देखना चाहते हैं। ऐसा संभव है नहीं इसलिए इन दोनों बाबा ने अपने सीएम बनने के सवाल पर कोई जवाब नहीं दिया और न ही उनके व्यवहार से ऐसा लगा।
सबसे पहले बात करते हैं जयपुर के हवा महल से मात्र 974 वोटों से जीते बालमुकुंद आचार्य की क्योंकि जीतते ही उन्होंने अवैध मांस की दुकानों के खिलाफ उन्होंने अभियान चलाया है। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर उन्हें बतौर मुख्यमंत्री भी प्रोजेक्ट करने लगे हैं। मैं भी उनकी इस बात का समर्थक हूं कि मांस खुले में नहीं बिकना चाहिए, लेकिन जो उन्होंने सड़क पर उतर किया है वो तरीका गलत है। यह देश कानून व नियमों से चलता है और कानून व नियम विधानसभा लोकसभा में बनते हैं। सड़क पर दादागिरी और तानाशाही होती है। अच्छी बात यह है कि उनके इस तरीके की कई हिंदू भी आलोचना कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे को कई मुस्लिम भी सही मानते हैं कि अतिक्रमण और अवैध काम बंद होने चाहिए।
अब बात योगी आदित्यनाथ की करते हैं।
गोरखपुर में स्थित मठ के ये छोटे महाराज पांच बार सांसद चुने गए। विचारधारा के आधार पर इन्होंने राजनीति की, लेकिन गोरखपुर में किसी भी दुकान के सामने खड़े होकर उसे बंद नहीं करवाया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के तुष्टीकरण के खिलाफ लगातार सदन में और बाहर लड़ते रहे, लेकिन अपने समर्थकों के साथ किसी दुकान या अवैध बनने वाले मकान का विरोध नहीं किया बल्कि कानूनी कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद माफियाराज को खत्म करने से योगी आदित्यनाथ ज्यादा चर्चित हुए। उनके इस अभियान की खास बात यह है कि माफियाराज को खत्म करने में उन्होंने कहीं भी हिंदू-मुस्लिम का भेदभाव नहीं किया। राजनीति और प्रशासन चलाने का उन्हें लंबा अनुभव था, तभी उन्हें सीएम बनाया गया।
अब बात करते हैं उनके मठ की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक महंत हैं, भगवा कपड़े पहनते हैं, उनकी छवि एक कट्टर हिंदू वाली लगती है, लेकिन उनके मठ के भीतर का वातावरण आपकी इस सोच को बदलकर रख देगा। योगी के मठ के अंदर सांप्रदायि़कता का कोई कण नहीं नजर आता। बीते 35 वर्षों से गोरखनाथ मंदिर के अंदर होने वाला हर निर्माण कार्य एक मुस्लिम की निगरानी में होता आ रहा है, यासिन अंसारी ही मंदिर के खर्च का हिसाब-किताब रखते हैं। यह बातें उन बाबाओं को जानने की जरूरत है जो योगी की तरह मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।
अब बात करते हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। पीएम मोदी ने गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से पहले अपने जीवन के कई साल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के तौर पर बिताए हैं। उस वक्त की गुजरात की बीजेपी लॉबी उनका विरोध करती रही, सिर्फ अमित शाह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहे। गोदराकांड और गुजरात दंगों को छोड़ दिया जाए तो बतौर मुख्यमंत्री उनकी योजनाओं का गुजरात में जितने हिंदुओं को लाभा मिला उतना मुस्लिमों को भी नहीं मिला। अब भी केंद्रीय योजनाओं का लाभ देश में हर वर्ग को मिल रहा है।
यह बात अलग है कि मुस्लिमों का नाम लेने, उन्हें टिकट देने की बातें बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक दृष्टि से सूट नहीं करती है। लेकिन अब बीजेपी में आने वाले हर महंत या बाबा योगी और बीजेपी नेता खुद को मोदी की तरह बनाना चाहता है। ऐसा असंभव भी नहीं है क्योंकि क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड भी विराट जैसे खिलाड़ी तोड़ रहे हैं।
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