
जयपुर। राजस्थान में यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने शासन सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान तेजी से समान नागरिक संहिता की ओर अग्रसर है। इसके तहत राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किए जाएंगे। राज्य सरकार ने इस विधेयक का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाज रहेंगे सुरक्षित
संवैधानिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में 14 अप्रैल, 2026 को इस विषय पर सार्थक कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके अंतर्गत आदिवासी समुदाय के रीति-रिवाजों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के मद्देनजर यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। अनुच्छेद 44 में उल्लेख है कि राज्य, भारत के समस्त राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी समिति की अध्यक्षता
‘राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:
अध्यक्ष: उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
सदस्य: सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता बसंत सिंह छाबा, राजकीय विधि महाविद्यालय (श्रीगंगानगर) के सेवानिवृत्त प्राचार्य रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान।
सदस्य सचिव: अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को इस समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
कानून के प्रारूप को समावेशी और पारदर्शी बनाने के लिए यह समिति संभाग स्तर पर जन-संवाद को प्राथमिकता देगी। इसके अलावा, एक विशेष वेबसाइट के माध्यम से राज्य के आम नागरिक अपने सुझाव सीधे समिति तक पहुंचा सकेंगे।
यूसीसी लागू होने से होने वाले प्रमुख बदलाव और उद्देश्य
समान नागरिक संहिता का मुख्य ध्येय राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के हों। वर्तमान में शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे मामलों में अलग-अलग पर्सनल लॉ काम करते हैं। यूसीसी लागू होने से ये विसंगतियां समाप्त होंगी और महिलाओं को लैंगिक समानता व पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे।
इसके तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित बदलाव शामिल होंगे:
अनिवार्य पंजीकरण: विवाह और तलाक का पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप: लिव-इन रिलेशनशिप का भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
कुप्रथाओं पर रोक: बहुविवाह (एक से अधिक शादी) पर पूर्ण रूप से रोक लगेगी।
समान संपत्ति अधिकार: पैतृक संपत्ति में बेटा और बेटी दोनों को समान अधिकार प्राप्त होगा।
राज्य सरकार इस समिति के माध्यम से राजस्थान की आवश्यकताओं और सामाजिक ताने-बाने के अनुरूप एक आदर्श और प्रगतिशील कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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