मेवाड़ में बीजेपी कई सीटों पर फंसी, कुछ जगह नंबर 3 पर जाने की आशंका, दांव पर लगी है प्रदेशाध्यक्ष की इज्जत
उदयपुर। मेवाड़ में अधिकांश सीटों पर बीजेपी के प्रत्याशी कड़ी टक्कर में फंस गए हैं। जीत और हार का अंदाजा लगाना बीजेपी रणनीतिकारों के लिए भी मुश्किल हो गया है। कुछ सीटों पर तो बीजेपी के नंबर तीन लुढ़कने की आशंका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व यूपी के मुख्यमंत्री योगी की सभाओं का भी लोगों के दिलो दिमाग पर कोई प्रभाव नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि ये नेता सिर्फ कांग्रेस पर चुनिंदा मुद्दों पर ही हमले बोल रहे हैं। कांग्रेस इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय लोगों को राहत दिलाने की बात करती आ रही है।
उदयपुर में वल्लभनगर और मावली में त्रिकोणीय मुकाबलों में बीजेपी प्रत्याशी पिछड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अन्य सीटों पर बीजेपी विधायकों के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी को साफ देखा जा सकता है। चित्तौड़गढ़ में तो बीजेपी के ही बागी चंद्रभान सिंह आक्या का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के साथ बताया जा रहा है। यहां बीजेपी के प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी है जो पहले जयपुर में विद्याधर नगर से विधायक थे और वहां से दीया कुमारी को मैदान में उतारा है।
राजसमंद जिले में राजसमंद सीट पर बीजेपी प्रत्याशी दीप्ति माहेश्वरी को इस बार उतना समर्थन नहीं मिल रहा है। यहां बाहरी का मुद्दा जोर पकड़े हुए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी के प्रति सहानुभूति हो सकती है। यहां बीजेपी का एक बागी भी है। नाथद्वारा में बीजेपी प्रत्याशी मेवाड़ राजघराने के विश्वराज सिंह मेवाड़ की वजह से वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है, लेकिन यहां डॉ. सीपी जोशी हारी बाजी जीतने वाले बाजीगर कहलाते हैं।
भीलवाड़ा में शहर में इस बार संघ व उनके अग्रिम संगठनों ने बीजेपी प्रत्याशी की बजाय निर्दलीय अशोक कोठारी को अपना समर्थन दिया है। यहां भी बीजेपी को बड़ा नुकसान होने का अनुमान है। शाहपुरा में मौजूदा बीजेपी के विधायक कैलाश मेघवाल निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उम्र के आधार पर बीजेपी ने उनका टिकट काटा है।
अब बात करते हैं वागड़ की 11 सीटों की। यहां सभी सीटों पर बीटीपी और बीएपी ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं और उनका वर्चस्व भी देखा जा रहा है। ये दोनों ही दल बीजेपी और कांग्रेस के वोट काटने वाले हैं। यहां भी बीजेपी कांग्रेस कुछ सीटों पर नंबर तीन पर लुढ़ सकती है। लब्बोलुआब यह है कि अब पूरे मेवाड़ में सियासी पैटर्न बदल रहा है। इसका नुकसान भाजपा और कांग्रेस दोनों को होने वाला है।
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