
नई दिल्ली। क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमाद अल-थानी की भारत यात्रा को लेकर जबरदस्त कूटनीतिक गर्माहट देखने को मिली। सोमवार रात जब उनका विमान नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, तो स्वागत के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर मौजूद थे।
यह सिर्फ एक शिष्टाचार नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रिश्तों का प्रतीक था। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “मेरे भाई क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमाद अल-थानी का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट गया था। आशा करता हूं कि उनकी भारत यात्रा सफल होगी। मंगलवार को उनकी मुलाक़ात को लेकर उत्साहित हूं।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी और इस यात्रा को भारत-क़तर संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला बताया।
भारत-क़तर संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और क़तर के कूटनीतिक रिश्तों की नींव 70 के दशक में पड़ी थी। जनवरी 1973 में क़तर ने भारत में अपना पहला चार्ज द अफेयर्स नियुक्त किया और मई 1974 में अपना पहला राजदूत भेजा।
आज दोनों देश न केवल राजनीतिक सहयोग में बल्कि व्यापार, ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों के योगदान के लिहाज से भी बेहद मजबूत साझेदार हैं। क़तर, भारत के लिए एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है, जबकि लाखों भारतीय वहां काम कर रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
इस यात्रा के मायने
अमीर तमीम की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर कई अहम समझौतों की संभावना जताई जा रही है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि इस यात्रा से भारत-क़तर संबंधों को कौन से नए आयाम मिलते हैं और यह मुलाक़ात क्या नई आर्थिक एवं कूटनीतिक संभावनाओं के द्वार खोलती है।
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