
जयपुर।
जयपुर के मानसरोवर इलाके में 12 साल की मासूम दिव्या की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 10 मार्च को वह अपने स्कूल परीक्षा देने गई, लेकिन घर वापसी से पहले ही मौत ने उसे घेर लिया। अब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन दिव्या की मौत का सच अब भी गहरी धुंध में छिपा हुआ है।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने दिव्या को इतना टॉर्चर किया कि वह खुद को खत्म करने पर मजबूर हो गई। दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन का दावा है कि दिव्या को चीटिंग करते पकड़ा गया था और उसे सिर्फ समझाया गया था। लेकिन सवाल उठता है—जो बच्ची क्लास की टॉपर थी, वह नकल क्यों करेगी?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज गायब हैं। अगर स्कूल के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो आखिर फुटेज क्यों हटाए गए?
दिव्या का मामला एक चेतावनी है कि स्कूल सिर्फ शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा का भी केंद्र होना चाहिए। अगर किसी संस्थान में इतना दबाव हो कि मासूम जिंदगियां दम तोड़ दें, तो हमें अपनी व्यवस्था पर सवाल उठाने की जरूरत है।
क्या पुलिस इस रहस्य से पर्दा उठा पाएगी? या फिर यह भी उन अनसुलझे मामलों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा, जहां न्याय की उम्मीद दम तोड़ देती है?
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