
उदयपुर। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक और मील का पत्थर जोड़ते हुए हिंदुस्तान जिंक, मंजरी फाउंडेशन और सखी शक्ति समिति ने जावर स्टेडियम में “सखी उत्सव” का भव्य आयोजन किया। इस समारोह में 1,000 से अधिक महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया, जिसमें लोक नृत्य, खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही।
कार्यक्रम में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने हिंदुस्तान जिंक की इस पहल की सराहना करते हुए कहा,
“हिंदुस्तान जिंक सिर्फ एक खनन कंपनी नहीं, बल्कि रोजगार और सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण जरिया है। ‘सखी’ शब्द ही अपने आप में शक्ति का प्रतीक है, और इस परियोजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है।”
इस अवसर पर सलूंबर विधायक शांता अमृतलाल मीणा, आईबीयू सीईओ जावर माइंस राम मुरारी, मजदूर संघ के सचिव लालूराम मीणा, वेदांता ग्रुप सीएसआर हेड अनुपम निधि सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

“सखी”—महिलाओं के लिए नया भविष्य
आईबीयू सीईओ जावर माइंस राम मुरारी ने कहा,
“हम मानते हैं कि महिलाओं में असीम शक्ति है। वे न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज और देश की रीढ़ हैं। ‘सखी’, ‘शिक्षा संबल’, ‘समाधान’ और ‘जिंक कौशल’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए हम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।”
उत्सव में जोश, उमंग और सशक्तिकरण का संगम
कार्यक्रम के दौरान मटकी फोड़, रस्साकस्सी, कबड्डी, जलेबी रेस जैसी पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं ने समां बांध दिया। महिलाओं ने राजस्थानी लोकगीतों पर नृत्य कर उत्सव में रंग भर दिया।
इस आयोजन के दौरान :
✔ 100 प्रशिक्षित बालिकाओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
✔ खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
✔ ‘सखी’ परियोजना से जुड़ी महिलाओं द्वारा लोक नृत्य व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।

हिंदुस्तान जिंक : महिलाओं के लिए संबल
हिंदुस्तान जिंक द्वारा राजस्थान के उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौड़गढ़ और उत्तराखंड के पंतनगर में 6 जिलों और 200 गांवों में 2,000 से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 25,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त किया गया है।
सखी उत्सव में रुक्मणी मीणा (सखी फेडरेशन अध्यक्ष) ने परियोजना की वर्षभर की गतिविधियों की जानकारी दी और बताया कि कैसे यह पहल महिलाओं के जीवन को आर्थिक और सामाजिक रूप से बदल रही है।
नारी शक्ति का महोत्सव
‘सखी’ सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि बदलाव की एक क्रांति है। आत्मनिर्भर महिलाओं का यह संगम बताता है कि जब महिला आगे बढ़ती है, तो समाज भी प्रगति करता है। हिंदुस्तान जिंक का यह प्रयास नारी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह पहल और अधिक महिलाओं के जीवन को संवारने का कार्य करेगी।
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