
उदयपुर। शहर के अम्बावगढ़ पहाड़ी पर वाक़े दरगाह हज़रत गंज शहीदा बाबा के सालाना तीन रोज़ा 77वें उर्स की रौनकात जारी हैं। इसी सिलसिले में शनिवार की रात महफ़िले-सीमाँ का पुरअसर आयोजन किया गया, जिसमें नामवर क़व्वाल पार्टियों ने अपने-अपने दिलनशीं कलाम पेश कर महफ़िल में रंग-ओ-नूर बिखेर दिया।
दरगाह कमेटी के प्रवक्ता मोहसिन हैदर ने बताया कि उर्स के दौरान तमाम मज़ाहिब के अकीदतमंद आस्ताना-ए-आलिया पर हाज़िर होकर फूल, इतर और चादर शरीफ़ पेश कर रहे हैं। वहीं अपनी मन्नतें पूरी होने पर अकीदतमंदों ने दुध-दलिया पर फ़ातेहा दिलाते हुए ज़ायरीन में तबर्रुक़ तक़सीम किया। दरगाह कमेटी की तरफ़ से आम लंगर में हर आने वाले को खाना खिलाया गया। ज़ायरीन की सहूलियत के लिए सेक्रेट्री जावेद ख़ान, नफ़ीस ख़ान, इरफ़ान ख़ान छन्नू, मोहम्मद शौकत, इंतख़ाब आलम, नईम ख़ान, बिलाल ख़ान, साहिल शेख, राफ़े, हसनैन और दूसरे मेंबरान हर वक़्त मौजूद रहे।
कमेटी के सदर ग़ुलाम मुईनुद्दीन क़ादरी उर्फ़ राजा भाई ने बताया कि उर्स के दूसरे दिन शनिचर की रात नमाज़-ए-ईशा के बाद महफ़िले-सीमाँ—यानी क़व्वाली का प्रोग्राम सजाया गया। दरगाह के दस्तारबंद क़व्वाल रफ़ीक मस्ताना वारसी और मस्ताना अख़लाक सुल्तानी उदयपुरी इंटरनेशनल क़व्वाल ने सबसे पहले हम्द-ए-पाक पेश की। उसके बाद नातिया और मनक़़बत के कलाम पढ़ते हुए महफ़िल में सुफ़ियाना कैफ़ियत पैदा कर दी।
महफ़िल की दूसरी कड़ी में जयपुर के मशहूर क़व्वाल जुबै़र नईम अजमेरी ने अपने बेहतरीन कलाम से समां बाँध दिया और भरपूर दाद हासिल की।
क़व्वाली की रौनक के दौरान दरगाह कमेटी ने रात एक बजे आस्ताना-ए-आलिया पर संदल-ख़्वानी की रस्म अदा की। इसके बाद फ़ातेहा-ख़्वानी, सलात-o-सलाम और दुआ की गई।
उर्स के चलते आज होगा उर्स का समापन
तीसरे दिन, यानी 30 नवम्बर रविवार को दोपहर बाद नमाज़-ए-जुहर के बाद कुल की महफ़िल शुरू होगी जिसमें क़व्वाल पार्टियाँ अपने रूहानी कलाम पेश करेंगी। शाम नमाज़-ए-असर के बाद कुल की फ़ातेहा के साथ इस सालाना उर्स का परवाना मुकम्मल होगा।
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