
उदयपुर। कल तक जिसे ‘पुरुषों का गढ़’ कहा जाता था, आज वहाँ की आबोहवा बदल गई है। चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स की उन विशाल मशीनों की गूंज में अब एक नया स्वर शामिल हो गया है—एक ऐसा स्वर जो आत्मविश्वास से भरा है, जो नेतृत्व की कसम खाता है। यह स्वर है ‘तेजस्विनी’ का।
हिंदुस्तान जिंक ने केवल एक ‘ऑल-वुमन शिफ्ट’ की शुरुआत नहीं की है, बल्कि सदियों पुरानी उस बेड़ी को तोड़ दिया है जो कहती थी कि भारी उद्योग और मेटलर्जी महिलाओं के बस की बात नहीं। आज 30 जांबाज महिला प्रोफेशनल्स की यह टीम, तान्या सिंह के नेतृत्व में, लोहा मनवाने को तैयार है।
नारी शक्ति का नया अध्याय : “जब इरादे फौलादी हों, तो पत्थर भी मोम बन जाता है। ये महिलाएं केवल जिंक का उत्पादन नहीं कर रही हैं, बल्कि नए भारत की तकदीर गढ़ रही हैं।”
सोचिए, जहां तापमान की तपिश और भारी मशीनरी का शोर हो, वहां अब कोमल लेकिन मजबूत हाथों में कमान है। लीचिंग से लेकर प्यूरिफिकेशन तक, और मेंटेनेंस से लेकर सुरक्षा तक—हर मोर्चा अब इन ‘तेजस्विनियों’ के हवाले है। यह महज़ एक नौकरी नहीं, बल्कि उन लाखों लड़कियों के लिए एक उम्मीद है जो बड़े सपने देखने से डरती थीं।
आंकड़ों से परे, आत्म-गौरव की कहानी : हिंदुस्तान जिंक में आज 26.3% कार्यबल महिलाओं का है। यह सिर्फ एक नंबर नहीं है, यह एक क्रांति है। यह प्रमाण है कि जब अवसर की जमीन उपजाऊ हो, तो महिलाएं आसमान छूने का माद्दा रखती हैं।
सीईओ अरुण मिश्रा के शब्दों में भी वही विश्वास झलकता है कि माइनिंग का भविष्य अब ‘विविधता’ और ‘समानता’ के स्तंभों पर खड़ा होगा। ‘तेजस्विनी’ का उदय इस बात का प्रतीक है कि लीडरशिप जेंडर से नहीं, काबिलियत और जुनून से तय होती है।
सुरक्षा और स्वाभिमान का संगम
कंपनी ने न केवल अवसर दिए, बल्कि एक सुरक्षित ‘आंचल’ भी प्रदान किया है। अंडरग्राउंड माइन रेस्क्यू टीम : जान बचाने का जज्बा। नाइट शिफ्ट और टेली-रिमोट ऑपरेशंस : अंधेरे को चीरती आत्मनिर्भरता।
हाई-टेक सुरक्षा कवच : वी-सेफ ऐप और सीसीटीवी की निगरानी में निडर उड़ान।
आज जब चंदेरिया के स्मेल्टर से शुद्ध जिंक बाहर निकलता है, तो उसमें केवल धातु की चमक नहीं होती, उसमें उन 30 महिलाओं के पसीने, उनकी मेहनत और उनके टूटते रूढ़िवादी बंधनों की चमक भी शामिल होती है। ‘तेजस्विनी’ केवल एक नाम नहीं, एक प्रतिज्ञा है—कि अब बेटियाँ रुकेंगी नहीं, अब बेटियां थकेंगी नहीं।
वेदांता समूह और हिंदुस्तान जिंक का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है कि हां, हम नेतृत्व कर सकती हैं, हम दुनिया बदल सकती हैं।
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