स्रोत : तेहरान टाइम्स
तेहरान। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहा संघर्ष आगे और बढ़ सकता है। उन्होंने क्षेत्र के उन पड़ोसी देशों से भी अपील की, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, कि वे वाशिंगटन के साथ अपना सहयोग समाप्त करें।
यह संदेश ऐसे समय में जारी किया गया है जब लगभग दो सप्ताह पहले अमेरिका और इज़राइल पर उनके पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या का आरोप लगाया गया था। उसी दिन ईरान के कई नागरिक और सैन्य ठिकानों पर भी बमबारी की गई थी। पिछले सप्ताह विशेषज्ञों की परिषद (असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स) ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना।
अपने संबोधन में मोजतबा खामेनेई ने हाल के दिनों में ईरानी बलों द्वारा किए गए हमलों की सराहना करते हुए कहा कि मौजूदा जवाबी कार्रवाई “सिर्फ शुरुआत” है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि युद्ध जारी रहता है तो ईरान नए और अप्रत्याशित मोर्चे खोल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ईरान की प्रमुख रणनीति बनी रहेगी। उनके अनुसार, दुश्मन को कमजोर करने के लिए अन्य संभावित मोर्चों पर भी अध्ययन किया जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सक्रिय किया जाएगा।
क्षेत्रीय देशों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों की जमीन पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, उन्हें तुरंत बंद कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन ठिकानों का उपयोग ईरान के खिलाफ हमलों में किया गया तो ईरान उन्हें निशाना बनाने से नहीं हिचकेगा।
अपने भाषण में उन्होंने बदले का भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश के हर शहीद का खून अलग-अलग तरीके से न्याय और प्रतिशोध की मांग करता है और ईरान अपने शहीदों के खून का बदला जरूर लेगा।
नए नेता ने युद्ध में घायल लोगों के लिए मुफ्त और व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान दुश्मन की संपत्तियों से क्षतिपूर्ति लेने की कोशिश करेगा और यदि यह संभव नहीं हुआ तो “उतनी ही मात्रा में उन्हें नष्ट किया जाएगा।”
उन्होंने तथाकथित “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” के सहयोगियों के प्रति भी एकजुटता जताई और विशेष रूप से यमन, लेबनान के संगठन हिज़्बुल्लाह तथा इराक में सक्रिय प्रतिरोध समूहों का उल्लेख करते हुए उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
अपने संबोधन के अंत में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए “सत्य के मोर्चे का झंडा ऊंचा” रखने और देश को विजय दिलाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास करेंगे। उन्होंने पवित्र महीने रमज़ान की शेष रातों में देश की सफलता के लिए दुआ की।
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