
उदयपुर। मेवाड़ की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। उदयपुर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट और पत्र के माध्यम से जिले के एक “कद्दावर गुरु” (वरिष्ठ नेता) पर तीखा तंज कसा है। जोशी ने सीधे तौर पर नेता की टीम और उनके समर्थकों की क्षमता पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति का “दुर्भाग्य” करार दिया है।
गुरु को खुद ढाल बनना पड़े, यह दुर्भाग्य
मांगीलाल जोशी ने अपने संदेश में ‘गुरु और चेले’ की परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि एक सफल नेता वही होता है जो अपने पीछे ऐसी मजबूत टीम (चेले) तैयार करे, जो संकट के समय गुरु के सम्मान के लिए ढाल बनकर खड़ी हो सके। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “यदि एक सामान्य कार्यकर्ता द्वारा उठाई गई चिट्ठियों के जवाब में गुरु को स्वयं ही अपने बचाव में उतरना पड़ रहा है, तो यह उस नेता के लिए शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।”
समर्थकों को बताया भीगी बिल्ली
जोशी ने वर्तमान नेतृत्व के समर्थकों पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘भीगी बिल्ली’ की संज्ञा दी। उन्होंने लिखा कि जिन चेलों को नेताजी अपनी धरोहर और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली फौज समझ रहे थे, वे विवाद होते ही कहीं दुबक गए हैं। जोशी ने सलाह दी कि नेता को भीड़ के भरोसे रहने के बजाय ऐसे पांच निष्ठावान कार्यकर्ता तैयार करने चाहिए जो विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता से अपना पक्ष रख सकें।
पुराने कार्यकाल की याद दिलाई
अपने कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए मांगीलाल जोशी ने लिखा कि जब वे अध्यक्ष थे, तब उन्होंने कभी भी वरिष्ठ नेता (गुरु) को विवादित मामलों में सामने नहीं आने दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मेरे कार्यकाल में मैंने आपको किसी भी मुद्दे पर सामने आने से मना किया था और सभी विवाद खुद सुलझाए थे, ताकि आपकी गरिमा बनी रहे।”
“झूठी तारीफ से कोई शेर नहीं बनता”
पत्र के अंत में जोशी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे डरपोक चेलों की झूठी तारीफ करने से वे ‘शेर’ नहीं बन जाएंगे। उन्होंने नेता को चेताया कि उदयपुर की राजनीति में वह खुद को ऐसी भीड़ के भरोसे न छोड़ें जो वक्त आने पर साथ खड़ा होने का साहस न जुटा सके।
राजनीतिक मायने : उदयपुर भाजपा में हाल ही में हुए ‘चिट्ठी बम’ विवाद के बाद मांगीलाल जोशी का यह बयान आग में घी डालने जैसा है। उनके इस हमले ने साफ कर दिया है कि संगठन के भीतर गुटबाजी गहरे तक पैठ बना चुकी है और पुराने निष्ठावान कार्यकर्ता वर्तमान कार्यप्रणाली से बेहद असंतुष्ट हैं। फिलहाल, भाजपा के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि जोशी का यह ‘निशाना’ आखिर किस कद्दावर नेता की ओर है।
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