
श्रीनगर | अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती ने इस शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की और ईरान के संयम को सराहा।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत और युद्धविराम की खबर पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए खुशी का दिन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस संकट को सुलझाने में पाकिस्तान के अहम रोल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुफ्ती के अनुसार, पाकिस्तान ने दुनिया को एक बड़े युद्ध की तबाही से बचाने में मदद की है।
पीडीपी प्रमुख ने ईरान की ‘हिम्मत’ और ‘बहादुरी’ की प्रशंसा करते हुए विपक्षी देशों पर निशाना साधा:
हमलों में अंतर: मुफ्ती ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के स्कूलों, कॉलेजों, पुलों और पावर हाउस को निशाना बनाया। इसके विपरीत, ईरान ने केवल सैन्य ठिकानों पर हमला किया और अस्पतालों या शिक्षण संस्थानों को नुकसान नहीं पहुँचाया।
ईरान की जनता को बधाई: उन्होंने कहा कि इतने मुश्किल हालात में भी ईरान के लोग आपे से बाहर नहीं हुए और धैर्य बनाए रखा। मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि यह सीजफायर स्थायी होगा और ईरान को प्रगति के पथ पर लौटने का मौका मिलेगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने भी शांति का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी लड़ाई से कभी किसी का भला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा:
इजरायल को नुकसान: अब्दुल्ला ने कहा कि इस युद्ध में इजरायल को भी भारी नुकसान और तबाही झेलनी पड़ी है।
शांति की अपील: उन्होंने सवाल उठाया कि आज तक किस लड़ाई ने फायदा पहुँचाया है? अंततः युद्ध केवल तबाही ही बढ़ाता है, इसलिए इसे अब पूरी तरह बंद होना चाहिए।
पार्टी में नए सदस्यों के शामिल होने के कार्यक्रम में महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के लिए वातावरण ‘घुटन भरा’ है। उन्हें सोशल मीडिया पोस्ट के लिए हिरासत में लिया जा रहा है और बेरोजगारी का बोझ उन पर बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं का राजनीति में आना इन समस्याओं के समाधान के लिए एक सकारात्मक कदम है।
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